राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफों के बाद विपक्ष ने उठाए सवाल; कहा केवल इस्तीफा नहीं, सख्त सजा मिले

लखनऊ/नई दिल्ली, 06 जुलाई 2026 (यूएनएस)। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास में चढ़ावा अनियमितता प्रकरण के बीच महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी, केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने केवल इस्तीफों को पर्याप्त न बताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया को बताया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। साथ ही ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद विपक्षी दलों ने इसे लेकर कई सवाल खड़े किए।

कांग्रेस ने कहा— केवल इस्तीफा नहीं, पूरे ट्रस्ट की जवाबदेही तय हो

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर ट्रस्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से सामने आ रही चढ़ावा अनियमितता की खबरें गंभीर थीं।

उन्होंने लिखा कि यह स्वागत योग्य है कि प्रभु राम के मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं, जिन पर गंभीर सवाल उठे हैं, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष वित्तीय निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसलिए वे अपनी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जब वर्षों तक कथित अनियमितताएं होती रहीं तो ट्रस्ट के सभी सदस्यों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

कृष्ण मोहन की नियुक्ति पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल

पवन खेड़ा ने अंतरिम महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन की नियुक्ति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिन पर पूरे प्रकरण को दबाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश केवल इस्तीफे नहीं चाहता, बल्कि पूरे ट्रस्ट का पुनर्गठन, सभी सदस्यों की स्वतंत्र जांच तथा सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में पूरे मामले की जांच चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के गठन और उसके सदस्यों की नियुक्ति से जुड़े सभी स्तरों पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

अरविंद केजरीवाल बोले— इस्तीफा नहीं, सख्त सजा मिले

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी ट्रस्ट की प्रेस वार्ता के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल इस्तीफा लेने से काम नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा, “हिंदू सनातनी इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा चाहते हैं। केवल इस्तीफा लेकर किसी को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।”

आदित्य ठाकरे ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि समाचारों के अनुसार राम मंदिर ट्रस्ट के दो पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं, लेकिन इससे कई बड़े प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं।

उन्होंने कहा कि यदि दान और चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोपों के कारण यह निर्णय लिया गया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय अथवा किसी सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है।

समाजवादी पार्टी ने उच्च न्यायिक जांच की मांग दोहराई

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को मामला सामने आने के तुरंत बाद प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

ट्रस्ट ने किया प्रशासनिक बदलाव

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने सोमवार की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करने के साथ-साथ कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने का भी निर्णय लिया है तथा मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है।

न्यास ने यह भी स्पष्ट किया है कि चढ़ावा अनियमितता प्रकरण की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसमें एसआईटी की जांच प्रगति, नई नियुक्तियों और प्रशासनिक सुधारों पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद अब यह मुद्दा केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष जहां इसे जवाबदेही और स्वतंत्र जांच का विषय बना रहा है, वहीं ट्रस्ट का कहना है कि प्रशासनिक सुधारों और निष्पक्ष जांच के माध्यम से श्रद्धालुओं का विश्वास पूरी तरह बहाल किया जाएगा।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *