लखनऊ, 06 जुलाई 2026 (यूएनएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार नहीं, बल्कि संगठन और सरकार के बीच सत्ता का संघर्ष चल रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण में लोगों की धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ खिलवाड़ किया गया है तथा सरकार का पूरा ध्यान इस मामले की सच्चाई सामने लाने के बजाय अपने अंदरूनी विवादों को संभालने में लगा हुआ है।
सोमवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लोगों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने से अधिक अपने आंतरिक संघर्ष को लेकर चिंतित दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी आस्था और भक्ति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सब जानते हैं कि क्या हो रहा है, लेकिन कोई बोलने को तैयार नहीं है। डबल इंजन सरकार साथ नहीं चल रही है। दोनों इंजन आपस में टकरा रहे हैं। यह सत्ता का संघर्ष है। इन्हें न आस्था की चिंता है और न ही भक्ति की।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग लालच में इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें जनता की भावनाओं की कोई परवाह नहीं रह गई है। उनका कहना था कि कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल भी भाजपा के भीतर चल रही सत्ता की खींचतान को उजागर करता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि यह मामला प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अथवा आयकर विभाग के पास जाता तो जांच का स्वरूप अलग होता, लेकिन उससे पहले ही राज्य सरकार ने पूरी प्रक्रिया अपने हाथ में ले ली। उन्होंने कहा, “दिल्ली कुछ सोचती, उससे पहले ही लखनऊ ने सब अपने हाथ में ले लिया। यह सब सत्ता के संघर्ष की वजह से हो रहा है।”
उन्होंने देशभर के रामभक्तों, अयोध्या के संतों, उच्चतम न्यायालय, लोकसभा अध्यक्ष, अयोध्या के नागरिकों तथा पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज से इस पूरे प्रकरण पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ दौरे का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस दौरे से संगठन और सरकार के बीच चल रही दूरी भी स्पष्ट हो गई। उन्होंने कहा, “जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लखनऊ आए तो ऐसा लगा जैसे पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया हो। इससे साफ है कि संगठन और सरकार के बीच बहुत बड़ा झगड़ा चल रहा है।”
उन्होंने भाजपा नेताओं द्वारा चाय की दुकान पर चाय पीने को लेकर भी कटाक्ष करते हुए कहा, “जब आपके पास करने के लिए कुछ नहीं होता, तब आप चाय पीते हैं।”
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी का सदस्यता अभियान और अधिक तेज किया जाएगा ताकि संगठन को गांव, बूथ और प्रत्येक क्षेत्र तक मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेगी और संगठन को जमीनी स्तर पर विस्तार देगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान राज्य सरकार आज भी उनके कार्यकाल में शुरू की गई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर राजनीतिक श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। उन्होंने जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संघर्ष, विचार और समाजवादी आंदोलन का महत्वपूर्ण स्मारक है, जिसे जानबूझकर उपेक्षित किया गया।
अखिलेश यादव ने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई थी, तब उसके सामने यह प्रश्न था कि उसका वैचारिक मार्ग क्या होगा। उस समय पार्टी ने स्वयं को धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी विचारधारा से जोड़ने का प्रयास किया था तथा अपने पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के माध्यम से जयप्रकाश नारायण के विचारों का अनुसरण करने का संदेश दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज वही पार्टी अपने पुराने दावों और मूल्यों से पूरी तरह भटक चुकी है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के अनेक नेता आगामी विधानसभा चुनाव में अपना निर्वाचन क्षेत्र बदलना चाहते हैं। अखिलेश यादव ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें आत्मविश्वास है तो वे उसी निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ें, जहां से पहले विजयी हुए थे। उन्होंने कहा, “हम उन्हें वहीं हराने के लिए तैयार हैं।”
पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने अभियंत्रण शिक्षा, आधारभूत संरचना, युवाओं के रोजगार तथा प्रदेश के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर भी राज्य सरकार की आलोचना की। उनका कहना था कि सरकार के दावों और जमीनी वास्तविकता में बड़ा अंतर है तथा उत्तर प्रदेश की जनता आने वाले समय में इसका उचित उत्तर देगी।
