लखनऊ, 06 जुलाई (यूएनएस)। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लखनऊ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर शिक्षाविद् और अखंड भारत का प्रबल समर्थक बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “भारत माता के महान सपूत, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे’ का उद्घोष करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज 125वीं पावन जयंती है। इस अवसर पर उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”
इतिहास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की साजिशें रची जा रही थीं, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मजबूती से उसके विरोध में खड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि आज यदि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग है तो इसका श्रेय डॉ. मुखर्जी के दृढ़ नेतृत्व और बुलंद आवाज को जाता है।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती केंद्र सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि खाद्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में कार्य करते समय जब तत्कालीन नेहरू सरकार की तुष्टीकरण की नीतियां देश की अखंडता के लिए चुनौती बनने लगीं, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्ता का मोह त्यागकर मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना उचित समझा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हो सका। उन्होंने इसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और संकल्प की ऐतिहासिक जीत बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह देश का सौभाग्य है कि जिस बंगाल को पाकिस्तान के खूनी पंजे से बचाने में डॉ. मुखर्जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आज वहीं उनकी विचारधारा को मानने वाली सरकार के सहयोग से उनके जीवन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और विकास डबल इंजन सरकार द्वारा किया जा रहा है।
