लखनऊ, 21 मई 2026। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ नगर निगम की मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करने का बड़ा आदेश दिया है। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस क़मर हसन रिज़वी की बेंच ने यह कार्रवाई वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को समय पर शपथ न दिलाए जाने पर की।
मामला उस समय शुरू हुआ जब फैजुल्लागंज वार्ड के पूर्व पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन निरस्त होने के बाद चुनाव न्यायाधिकरण और सत्र न्यायालय ने 19 दिसंबर 2025 को ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित किया था। बावजूद इसके, करीब पांच महीने तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई।
इस पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने शपथ दिलाने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब तक निर्वाचित पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज रहेंगे।
सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक, डीएम और नगर आयुक्त संभालेंगे कामकाज
अदालत ने इससे पहले लखनऊ के मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश भी दिया था। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायाधिकरण द्वारा निर्वाचित घोषित प्रतिनिधि को शपथ दिलाने में अनावश्यक देरी की गई है, जो न्यायिक आदेशों की अवमानना के समान है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नगर निगम के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और नगर आयुक्त के माध्यम से संचालित किए जाने की संभावना है।
इधर, सुनवाई से पहले ही मेयर सुषमा खर्कवाल की तबीयत बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार बड़े मंगल के अवसर पर कई भंडारों में शामिल होने और अत्यधिक गर्मी के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई थी। गुरुवार सुबह चक्कर आने के बाद उन्हें कमांड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
