काशी में दो दिन ‘वार्म नाइट’ और लू का रेड अलर्ट, गंगा घाटों पर पसरा सन्नाटा

वाराणसी, 21 मई 2026 (यूएनएस)। वाराणसी में भीषण गर्मी और लू का असर लगातार तेज होता जा रहा है। मौसम विभाग ने इस वर्ष पहली बार शहर में लगातार दो दिनों के लिए लू का रेड अलर्ट जारी किया है। 22 और 23 मई को तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि रात में भी लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है।

47 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान, बिजली खपत ने भी तोड़ा रिकॉर्ड

गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.8 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना रहा। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गर्म हवाएं लोगों की परेशानी और बढ़ा सकती हैं।

मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। प्रचंड गर्मी का असर शहर की सड़कों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय प्रमुख मार्गों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा, जबकि लोग धूप से बचने के लिए गमछा, टोपी और छाते का सहारा लेते नजर आए।

वहीं शिकंजी, जूस और ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अधिक पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और तेज धूप से बचने की सलाह दी है।

गर्मी के बीच बच्चों में तैराकी सीखने का उत्साह भी बढ़ा है। देशभर में डूबने की घटनाओं के बाद वाराणसी में अभिभावक अपने बच्चों को तैराकी प्रशिक्षण दिलाने के लिए आगे आ रहे हैं। गर्मियों की छुट्टियों में गायघाट पर प्रतिदिन तैराकी क्लास आयोजित की जा रही है, जहां बड़ी संख्या में बच्चे हिस्सा ले रहे हैं।

भीषण गर्मी का असर पर्यटन और रोजगार पर भी पड़ रहा है। गंगा घाटों पर पर्यटकों की संख्या कम हो गई है, जिससे घाट किनारे दुकान लगाने वाले दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिन के समय नाव संचालन भी लगभग ठप हो गया है, क्योंकि तेज धूप के चलते पर्यटक नाव से गंगा भ्रमण करने से बच रहे हैं।

इधर गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग ने भी नया रिकॉर्ड बना दिया है। बिजली विभाग के अनुसार 19 मई को ही बिजली की मांग 900 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह स्तर 14 जून को दर्ज किया गया था। बढ़ती खपत के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों के कई बिजली उपकेंद्र ओवरलोड हो गए हैं। प्रतिदिन 4 से 5 ट्रांसफॉर्मर फुंकने की घटनाएं सामने आ रही हैं। विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि जून और जुलाई में बिजली की मांग 1200 मेगावाट तक पहुंच सकती है।

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