सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस को सामान्य रैशेज समझने की गलती पड़ सकती है भारी

गर्मी के मौसम में त्वचा पर लाल दाने, खुजली, जलन और रैशेज जैसी समस्याएं आम मानी जाती हैं। धूप, पसीना और प्रदूषण के कारण होने वाली इन परेशानियों को लोग अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई बार चेहरे पर लंबे समय तक बने रहने वाले लाल रैशेज किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बने रहने वाले कुछ खास प्रकार के रैशेज सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस नामक ऑटोइम्यून बीमारी का लक्षण हो सकते हैं। यह ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही स्वस्थ ऊतकों पर हमला करने लगती है, जिससे सूजन और कई अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

चेहरे पर तितली जैसे रैश हो सकते हैं संकेत

ल्यूपस के सबसे पहचान योग्य लक्षणों में “बटरफ्लाई रैश” शामिल है। यह रैश दोनों गालों और नाक के ऊपरी हिस्से पर तितली के आकार में फैल जाता है। सूरज की रोशनी में यह और अधिक लाल तथा स्पष्ट दिखाई देने लगता है। कई लोग इसे सामान्य हीट रैश, एलर्जी या सनबर्न समझ लेते हैं, जिससे बीमारी की पहचान देर से हो पाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि चेहरे पर रैश बार-बार हो रहे हों, लंबे समय तक बने रहें या उनके साथ थकान, जोड़ों में दर्द और बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस के आम लक्षण

विशेषज्ञ बताते हैं कि ल्यूपस के मरीजों में चेहरे पर लाल रैशेज के अलावा कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इनमें लगातार थकान, बुखार, जोड़ों में दर्द और सूजन, बाल झड़ना, मुंह में छाले, बिना कारण वजन कम होना तथा ठंड के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता शामिल हैं।

इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और कई बार कुछ समय के लिए गायब भी हो जाते हैं। इसी कारण मरीज लंबे समय तक अलग-अलग समस्याओं का इलाज कराते रहते हैं, लेकिन बीमारी की सही पहचान नहीं हो पाती।

शरीर के कई अंगों को पहुंच सकता है नुकसान

यदि समय पर इलाज न हो, तो ल्यूपस शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी गुर्दे, फेफड़ों, हृदय, रक्त वाहिकाओं और मस्तिष्क तक को नुकसान पहुंचा सकती है। यह बीमारी अधिकतर कम उम्र की महिलाओं में देखी जाती है, हालांकि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि चेहरे पर होने वाले रैशेज का इलाज बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड क्रीम से नहीं करना चाहिए। सही जांच के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ या रूमेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना जरूरी है। बीमारी की पुष्टि खून की जांच, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य लक्षणों के आधार पर की जाती है।

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