लखनऊ, 12 मई 2026 (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ में जिला अदालत परिसर और उसके आसपास बने वकीलों के चैंबरों पर नगर निगम द्वारा लाल क्रॉस लगाए जाने के बाद अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई है। नगर निगम ने कथित अतिक्रमण चिन्हित करते हुए कई चैंबरों की दीवारों पर लाल निशान बनाकर 16 मई तक उन्हें हटाने का नोटिस चस्पा किया है। चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर 17 मई को प्रशासन खुद कार्रवाई करेगा और उसका पूरा खर्च संबंधित अतिक्रमणकारी से वसूला जाएगा।
नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद वकीलों में रोष व्याप्त है। अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रशासन ने रात के अंधेरे में नोटिस लगाकर चैंबरों को निशानित किया। उनका आरोप है कि कोर्ट परिसर के बाहर ही नहीं, बल्कि अंदर बने चैंबरों पर भी लाल क्रॉस लगाए गए हैं, जिससे वकीलों में असुरक्षा और आक्रोश का माहौल है।
पुराने हाईकोर्ट गेट के बाहर स्थित बसंत लाल टी स्टॉल के संचालक दीपक ने बताया कि वह पिछले करीब 50-55 वर्षों से वहां दुकान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुबह दुकान खोलने पहुंचे तो नोटिस चस्पा मिला। दीपक का कहना है कि उनकी दुकान पक्की है और लंबे समय से संचालित हो रही है, लेकिन नगर निगम की कार्रवाई के चलते अब उसे हटाने का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जाम की समस्या पहले भी थी और आज भी बनी हुई है, ऐसे में केवल दुकानों और चैंबरों को हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट में दाखिल नगर निगम की रिपोर्ट में कोर्ट क्षेत्र में कुल 72 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर और कुछ दुकानें शामिल हैं। अदालत ने पूर्व में भी नगर निगम को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी।
बुधवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश पत्रों में बताया गया कि अपरिहार्य कारणों से पहले तय तिथि पर पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया जा सका। नगर निगम ने अदालत को सूचित किया था कि 12 मई को कार्रवाई की जाएगी, हालांकि फिलहाल प्रशासन ने नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने का मौका दिया है।
अब वकीलों और नगर निगम के बीच टकराव की स्थिति बनने के आसार हैं। अधिवक्ता संगठन इस मुद्दे पर जल्द बैठक कर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं।
