लखनऊ, 11 मई 2026। आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पांच राज्यों के चुनाव समाप्त होते ही सरकार ने जनता पर महंगाई का बोझ डालना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव तक सरकार यह दिखाती रही कि देश में किसी चीज की कमी नहीं है, लेकिन वोट पड़ते ही जनता को पेट्रोल, गैस और सोने के इस्तेमाल में कटौती की सलाह दी जाने लगी।
संजय सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि भाजपा सरकार महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट को भी “देशभक्ति” से जोड़कर जनता को मानसिक दबाव में रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग खुद ऐशोआराम, विदेशी यात्राओं और भव्य आयोजनों में किसी प्रकार की कटौती नहीं कर रहे हैं, जबकि आम जनता से त्याग की अपेक्षा की जा रही है।
आप सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में जनता से ईंधन बचाने, विदेश यात्राएं कम करने, खाने के तेल का सीमित उपयोग करने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी। संजय सिंह ने कहा कि चुनाव के दौरान यह “ज्ञान” सरकार को याद नहीं आया, क्योंकि उस समय केवल वोट लेने की चिंता थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद सरकार ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी। उनके मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों, चाय दुकानदारों और मेहनतकश लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर के दामों में भी 261 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे गरीब परिवार, छात्र और झुग्गियों में रहने वाले लोग प्रभावित होंगे।
संजय सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार जनता को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि “महंगाई में जीना ही देशभक्ति है।” उन्होंने कहा कि जनता से कहा जा रहा है कि गैस कम इस्तेमाल करो, सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, लेकिन दूसरी ओर भाजपा के रोड शो, रैलियां और राजनीतिक कार्यक्रम लगातार जारी हैं, जिनमें ईंधन की कोई बचत नहीं दिखाई देती।
उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और बड़े आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के ऐशोआराम और राजनीतिक प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आती, लेकिन आम नागरिकों से अपनी जरूरतों और सुविधाओं में कटौती करने को कहा जाता है।
सपा सांसद ने कहा कि भाजपा जनता को केवल “वोट की मशीन” समझती है। चुनाव के दौरान लोगों को राहत और वादों का भरोसा दिया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन्हें महंगाई और आर्थिक बोझ के हवाले छोड़ दिया जाता है।
संजय सिंह ने कहा कि अब जनता को खुद तय करना होगा कि वह कब तक महंगाई, बेरोजगारी और सरकार के “दोहरे रवैये” को चुपचाप सहन करती रहेगी।
