कोलकाता, 10 मई। शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की राजनीति में बड़ा प्रतीकात्मक दांव चलते हुए घोषणा की है कि अब पश्चिम बंगाल दिवस 20 जून को मनाया जाएगा। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ‘पोइला बैसाख’ को राज्य दिवस घोषित करने का फैसला पलट दिया गया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार जल्द ही कैबिनेट और विधानसभा में प्रस्ताव लाकर 20 जून को आधिकारिक रूप से ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ घोषित करेगी। उन्होंने कहा कि 20 जून 1947 वह ऐतिहासिक दिन था, जब बंगाल विधानसभा ने भारत के साथ रहने और विभाजन के पक्ष में मतदान किया था।
अधिकारी ने कहा कि इसी फैसले की वजह से पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अंग बना। उन्होंने इसे राज्य के इतिहास और पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण बताया।
शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री भवानीपुर स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद जैसे नेताओं के प्रयासों से पश्चिम बंगाल का अस्तित्व सुरक्षित रह सका।
दरअसल, बंगाल दिवस को लेकर विवाद पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2023 में तत्कालीन राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने केंद्र सरकार के निर्देश पर राजभवन में 20 जून को बंगाल दिवस मनाया था। उस समय ममता बनर्जी सरकार ने इसका विरोध किया था।
ममता बनर्जी का तर्क था कि 20 जून विभाजन और उससे जुड़ी हिंसा की याद दिलाता है। इसके बाद विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर बंगाली नववर्ष ‘पोइला बैसाख’ को राज्य दिवस घोषित किया गया था।
अब शुभेंदु अधिकारी सरकार ने उस फैसले को बदलते हुए 20 जून को आधिकारिक राज्य दिवस बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं बल्कि राज्य की वैचारिक और राजनीतिक दिशा को भी दर्शाता है।
