69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, पुलिस ने जबरन हटाकर ईको गार्डन भेजा

लखनऊ, 22 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ‘योगी बाबा न्याय करो, सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करो’ और ‘न्याय नहीं दे सकते तो इस्तीफा दो’ जैसे नारों के साथ अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी दो अलग-अलग समूहों में बंट गए, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों में विरोध देखने को मिला।

एक समूह ने चारबाग रेलवे स्टेशन के पास भीख मांगकर अनोखे तरीके से विरोध जताया, जबकि दूसरे समूह ने विधान भवन का घेराव करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच करीब आधे घंटे तक धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों और सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी के कारण उन्हें वर्षों से नियुक्ति नहीं मिल पा रही है। प्रदर्शन के दौरान महिला अभ्यर्थियों ने पुलिस पर अभद्रता के आरोप लगाए। उनका कहना है कि धक्का-मुक्की के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, चूड़ियां तोड़ी गईं और कपड़े तक फाड़े गए।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। कुछ अभ्यर्थियों को जबरन उठाकर (टांगकर) पुलिस वाहनों में बैठाया गया और सभी को ईको गार्डन भेज दिया गया। महिला अभ्यर्थियों को भी महिला पुलिसकर्मियों द्वारा बलपूर्वक हटाया गया।

प्रदर्शन में शामिल देवरिया के धनंजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने भीख मांगकर 470 रुपये इकट्ठा किए थे, जिसे पुलिस ने छीन लिया। उन्होंने कहा कि इसी पैसे से वे घर लौटने की योजना बना रहे थे, लेकिन अब उन्हें फिर से भीख मांगनी पड़ेगी। वहीं रायबरेली के अमित मौर्य ने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाले से प्रभावित अभ्यर्थी पिछले पांच वर्षों से सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सैकड़ों बार मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव कर चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार की लचर पैरवी के चलते उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है और वे आज भी बेरोजगार हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आर्थिक तंगी के बावजूद वे विभिन्न जिलों से किराया खर्च कर लखनऊ आते हैं, लेकिन हर बार निराश होकर लौटना पड़ता है। उनका कहना है कि बेरोजगारी के इस दौर में 100-200 रुपये भी उनके लिए बड़ी रकम है और इसी कठिन परिस्थिति में वे लगातार अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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