लखनऊ, 09 अप्रैल 2026। केशव प्रसाद मौर्य ने जन भवन (राजभवन), लखनऊ में आयोजित विश्व नवकार महामंत्र दिवस कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने आनंदीबेन पटेल से शिष्टाचार भेंट भी की।
अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति सदैव विश्व कल्याण, शांति और मानवता की भावना से ओत-प्रोत रही है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जब तनाव और अस्थिरता का वातावरण है, ऐसे समय में जैन धर्म का नवकार महामंत्र विश्व को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि विश्व नवकार महामंत्र दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक एकता, आध्यात्मिक जागृति और मानव कल्याण का व्यापक अभियान है। इस अवसर पर 108 देशों के लाखों लोगों द्वारा एक साथ नवकार महामंत्र का जाप करना विश्व शांति और समरसता के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
उप मुख्यमंत्री ने जैन समाज द्वारा किए जा रहे सेवा, गौसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सेवा, समर्पण और करुणा की भावना ही भारत की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने अपने संबोधन में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं, बल्कि शांति, धैर्य और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे उसे वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान मिल रही है।
उन्होंने प्रदेशवासियों को विश्व नवकार महामंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि नवकार महामंत्र अहिंसा, आस्था और आध्यात्मिक जागृति का आधार है, जो मानव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने सभी नागरिकों से इसके संदेशों को आत्मसात कर सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सतीश महाना सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जैन समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विश्व शांति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में सहायक होते हैं।
