लखनऊ, पांच अप्रैल (RNN): समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए रविवार को कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने से पहले नई जनगणना कराना आवश्यक है।
यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि किसी भी नीति की नींव सटीक आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि महिला आरक्षण का ढांचा 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों पर आधारित है, तो वह स्वाभाविक रूप से त्रुटिपूर्ण होगा।
सपा अध्यक्ष ने कहा, “दरअसल महिला आरक्षण बिल का आधार ही निराधार है। आरक्षण का आधार अगर कुल सीटों का एक-तिहाई है तो यह गणित का विषय है और गणित का आधार संख्याएं होती हैं, कोई हवा-हवाई बात नहीं। ऐसे मामलों में संख्या का आधार जनसंख्या होती है, जिसका आधार जनगणना होती है।”
उन्होंने कहा कि जब महिलाओं की जनसंख्या के लिए 2011 के पुराने आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा, तो महिला आरक्षण की पूरी आधारभूमि ही गलत हो जाएगी।
अखिलेश यादव ने मांग की कि पहले नई जनगणना कराई जाए और उसके बाद ही महिला आरक्षण लागू करने पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार महिलाओं की सही संख्या दर्ज नहीं करना चाहती, वह उन्हें वास्तविक आरक्षण कैसे दे सकती है।
उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद का बजट सत्र तीन दिन के लिए बढ़ाया गया है, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले 2023 में पारित कानून को वर्ष 2029 से लागू किया जा सके।
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में कहा था कि सदन जल्द ही एक महत्वपूर्ण विधेयक पर विचार करने के लिए फिर से बैठक करेगा।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान के लिए 2023 में संविधान संशोधन विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन विधेयक के नाम से जाना जाता है, पारित किया गया था। हालांकि, इस कानून को परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकता है।
