उप्र विधानसभा में गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़े एआई समिट विवाद की गूंज

लखनऊ, 19 फरवरी (RNN)। दिल्ली में आयोजित ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद की गूंज बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में सुनाई दी। समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने शून्य काल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार से पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की।

सपा विधायक सचिन यादव और पंकज मलिक ने आरोप लगाया कि ग्रेटर नोएडा स्थित निजी विश्वविद्यालय ने समिट में चीन-निर्मित एक उत्पाद को अपना नवाचार बताकर प्रस्तुत किया, जिससे प्रदेश और देश की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने इसे छात्र-छात्राओं के भविष्य और राज्य की शैक्षिक साख से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

इससे पहले सपा सदस्यों ने नियम 56 के तहत यह मुद्दा उठाने का प्रयास किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इसे यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि न तो समिट का आयोजन उत्तर प्रदेश में हुआ है और न ही राज्य सरकार इसकी आयोजक थी। हालांकि बाद में अधिष्ठाता मंजू सिवाच ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया।

सचिन यादव ने कहा कि यह कोई राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि सदन और प्रदेश की निष्ठा से जुड़ा प्रश्न है। उनका आरोप था कि समिट में प्रदर्शित ‘रोबोटिक डॉग’ को विश्वविद्यालय द्वारा अपना विकसित उत्पाद बताया गया, जबकि वह वास्तव में चीन की कंपनी Unitree Robotics का उत्पाद निकला। उन्होंने सरकार से जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में कोई भी निजी विश्वविद्यालय इस प्रकार का कदम न उठा सके।

पंकज मलिक ने कहा कि चूंकि विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में स्थित है, इसलिए जवाबदेही राज्य सरकार की भी बनती है। उन्होंने इसे देश की शैक्षिक विश्वसनीयता और सत्यनिष्ठा से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने मांग की कि निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए और यदि आरोप सिद्ध हों तो विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द की जाए।

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय को समिट में अपना स्टॉल खाली करना पड़ा था। विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने एक टीवी चैनल से बातचीत में ‘रोबोटिक डॉग’ को अपना विकसित उत्पाद बताया था, जिसके बाद विवाद गहरा गया।

समाचार लिखे जाने तक इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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