लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हुए हंगामे को लेकर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष से सदाचार की अपेक्षा करना “बेवकूफी” है और इस तरह की घटनाएँ लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं।
मुख्यमंत्री ने विधानपरिषद में अपने संबोधन के दौरान कहा कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण के समय किया गया विरोध न केवल संवैधानिक पद का अपमान है बल्कि एक महिला के प्रति असम्मानजनक व्यवहार भी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक मर्यादा और गरिमा का पालन करना सभी जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का व्यवहार आने वाली पीढ़ियों के लिए गलत उदाहरण प्रस्तुत करता है और राजनीतिक संवाद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर नकारात्मक राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ उनके दृष्टिकोण को उजागर करती हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य के विकास और कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अराजकता से अनुशासन और अव्यवस्था से सुशासन की ओर महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने “कर्फ्यू संस्कृति” से “जीरो टॉलरेंस” की नीति तक की यात्रा तय की है और कानून का राज स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता रही है।
योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में प्रशासनिक अस्थिरता और अपराध की स्थिति गंभीर थी, लेकिन वर्तमान शासन ने कठोर नीतियों और स्पष्ट प्रशासनिक दृष्टिकोण के माध्यम से स्थिति में सुधार किया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बाधाओं को दूर किया गया है और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था की मजबूती ही विकास की पहली शर्त है। उन्होंने प्रदेश में निवेश, औद्योगिक विकास और सामाजिक स्थिरता को बेहतर प्रशासन का परिणाम बताया। उनके अनुसार राज्य में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनने से विकास परियोजनाओं को गति मिली है और प्रदेश की छवि में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने “डबल इंजन सरकार” की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्पष्ट नीति, साफ नियत और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता ने राज्य को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय से विश्वास की ओर बढ़ चुका है और सामाजिक स्थिरता विकास की आधारशिला बन रही है।
मुख्यमंत्री के वक्तव्य पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने की संभावना है, क्योंकि विपक्षी दलों ने पूर्व में सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के वक्तव्य को राज्य में प्रशासनिक सुधारों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत बताया है।
योगी आदित्यनाथ ने अंत में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी राजनीतिक दलों को मर्यादा, संवाद और जिम्मेदारी के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश की प्रगति और स्थिरता के लिए राजनीतिक आचरण में गरिमा और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान अनिवार्य है।
