प्रयागराज, 15 फरवरी। उत्तर प्रदेश के संगम नगरी में आयोजित माघ मेला रविवार को महाशिवरात्रि स्नान के साथ सकुशल संपन्न हो गया। प्रशासन के अनुसार महाशिवरात्रि के अवसर पर लगभग 40 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा तट और त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई।
मेला प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि देर रात से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था और पूरे दिन स्नान का क्रम जारी रहा। करीब डेढ़ महीने तक चले इस धार्मिक आयोजन में इस वर्ष कुल 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। अधिकारियों के अनुसार 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर सर्वाधिक 4.36 करोड़ लोगों ने स्नान किया, जो इस मेले का सबसे बड़ा जमावड़ा रहा।
प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक रहा और इससे पूर्व के कई बड़े आयोजनों के आंकड़े पीछे छूट गए। मेले के दौरान यातायात, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि सभी घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
उन्होंने कहा कि मेले में जल सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें तैनात रहीं। इसके अलावा नाविकों और गोताखोरों को भी विभिन्न घाटों पर लगाया गया था। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, चिकित्सा शिविर और सहायता केंद्र स्थापित किए गए थे, जबकि सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की गई।
इस वर्ष माघ मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच विवाद को लेकर भी चर्चा में रहा। मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में भीड़ का हवाला देते हुए पुलिस द्वारा उन्हें समर्थकों के साथ आगे बढ़ने से रोके जाने पर विवाद उत्पन्न हुआ था। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेले के शेष पर्वों पर स्नान नहीं किया और प्रशासन के साथ मतभेद बने रहे।
धार्मिक आस्था, विशाल जनसमूह और व्यापक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच संपन्न हुआ इस वर्ष का माघ मेला शांति और सुव्यवस्था के साथ समाप्त हुआ। प्रशासन ने इसे सफल आयोजन बताते हुए श्रद्धालुओं के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है।
