झाँसी/लखनऊ, 14 फरवरी 2026। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में विकसित कृषि–विकसित भारत 2047 अभियान के अंतर्गत तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी-2026 का उद्घाटन किया। 14 से 16 फरवरी तक चलने वाले इस मेले का उद्देश्य आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचारों और मशीनीकरण को किसानों तक सीधे पहुँचाना है।
कार्यक्रम में मंत्री ने क्षेत्रीय कृषि विकास को गति देने के लिए श्री अन्न उत्कृष्टता केंद्र तथा खाद्य परीक्षण एवं प्रसंस्करण केंद्र का लोकार्पण किया। साथ ही 20 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाले प्राकृतिक एवं जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र और 11 करोड़ रुपये की प्राकृतिक कृषि उत्पाद परीक्षण प्रयोगशाला का शिलान्यास किया। अधिकारियों के अनुसार ये परियोजनाएँ बुंदेलखंड क्षेत्र में टिकाऊ कृषि, मूल्य संवर्धन और वैज्ञानिक परीक्षण सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगी।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से किसानों के खेत तक पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” का आह्वान करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है और राष्ट्रीय गेहूँ उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने किसानों से फसल चक्र अपनाने, गुणवत्तापूर्ण बीज शोधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल दिया।

मंत्री ने जानकारी दी कि बुंदेलखंड के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के साथ निःशुल्क मिनी किट, सोलर पंप और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन’ के अंतर्गत लाभार्थियों को 40 से 80 प्रतिशत अनुदान पर फार्म मशीनरी बैंक का सांकेतिक वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम में कृषि, बागवानी और पशुपालन क्षेत्र के लिए एआई आधारित मोबाइल एप्लीकेशन का लोकार्पण किया गया, जो उन्नत खेती प्रबंधन, मत्स्य पालन और पशु पोषण में किसानों की सहायता करेंगे। मंत्री ने विश्वविद्यालय के 200 एकड़ में विकसित मॉडल फार्म की सराहना करते हुए कहा कि चिया सीड, दलहन, तिलहन और मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा देकर क्षेत्र से पलायन रोकने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर सांसद अनुराग शर्मा, नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चन्द, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह तथा कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में 12 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन किया गया।
