श्रमिक संगठनों की एक दिन की हड़ताल का सामान्य जनजीवन पर सीमित असर

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (Agency)। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच की ओर से सरकार की कथित “मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों” के खिलाफ बृहस्पतिवार को आहूत एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का सामान्य जनजीवन पर कुल मिलाकर सीमित असर देखने को मिला। हालांकि कुछ राज्यों में आंशिक रूप से सेवाएं प्रभावित रहीं।

श्रमिक संगठनों ने कई राज्यों में कार्यालय परिसरों के बाहर प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर कर्मचारी समर्थन जताने के लिए कार्यस्थल पर देर से पहुंचे। मंच ने दावा किया कि इस हड़ताल में 30 करोड़ से अधिक श्रमिकों, किसानों और अन्य वर्गों ने भाग लिया तथा 600 से अधिक जिलों में लामबंदी की गई।

राज्यों में मिला-जुला असर

ओडिशा में 12 घंटे के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के दौरान सामान्य जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित रहा। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों सहित कई प्रमुख सड़कों के अवरुद्ध होने से सार्वजनिक परिवहन, बाजार और शैक्षणिक संस्थानों पर असर पड़ा। भुवनेश्वर, कटक, बालासोर, बेरहामपुर और संबलपुर समेत प्रमुख शहरों में बंद का प्रभाव महसूस किया गया।

झारखंड में बैंकिंग, बीमा और कोयला क्षेत्र पर असर पड़ा। बैंक ऑफ इंडिया कर्मचारी संघ के उपमहासचिव उमेश दास के अनुसार, राज्य में वाम दलों और कांग्रेस ने भी हड़ताल का समर्थन किया। छत्तीसगढ़ में कई राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे और बीमा कंपनियों व डाकघरों के कर्मचारियों ने भी भाग लिया, हालांकि परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं और अधिकांश बाजार खुले रहे। भिलाई इस्पात संयंत्र में कामकाज सामान्य बताया गया।

तमिलनाडु में चेन्नई और तूतीकोरिन बंदरगाहों पर संचालन प्रभावित रहा। कुछ औद्योगिक इकाइयों में सीमित कार्यबल के साथ उत्पादन जारी रहा, जबकि श्रीपेरंबदूर-ओरागदम क्षेत्र में माल ढुलाई प्रभावित हुई। केरल में राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘डाइस-नॉन’ घोषित किया।

गोवा में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं, जबकि आवश्यक सेवाएं जारी रहीं। मध्य प्रदेश में रक्षा प्रतिष्ठानों के 25 हजार से अधिक असैनिक कर्मचारी एक घंटे देरी से काम पर पहुंचे। पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और गुजरात में हड़ताल का खास असर नहीं देखा गया और अधिकांश सेवाएं सामान्य रहीं।

बाजार सामान्य: कैट

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा कि देशभर के बाजार खुले रहे और व्यापार सामान्य रूप से चलता रहा।

हड़ताल की मांगें

संयुक्त मंच के अनुसार, हड़ताल का उद्देश्य चार नई श्रम संहिताओं एवं संबंधित नियमों को रद्द कराने, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक को वापस लेने तथा ‘शांति अधिनियम’ को निरस्त करने की मांग को लेकर दबाव बनाना है। इसके अलावा मनरेगा की बहाली और ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को वापस लेने की भी मांग की जा रही है।

‘ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि बैंकिंग, बीमा, डाक, परिवहन, स्वास्थ्य, कोयला, गैस पाइपलाइन और बिजली क्षेत्र पर हड़ताल का प्रभाव पड़ेगा। किसान संगठनों ने भी विभिन्न स्थानों पर समर्थन में प्रदर्शन किए।

संयुक्त मंच में आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी सहित कई केंद्रीय श्रमिक संगठन शामिल हैं।

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