जन प्रतिनिधि काम न करे तो मतदाताओं के पास उसे वापस बुलाने का अधिकार हो : राघव चड्ढा

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (Agency) — राज्यसभा में बुधवार को शून्यकाल के दौरान सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही, प्रशासनिक लापरवाही से होने वाले हादसों, बुजुर्ग अभिभावकों की देखभाल, अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े मुद्दों और कृषि प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना जैसे विभिन्न विषय उठाए और सरकार से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया।

आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य राघव चड्ढा ने ‘राइट टू रिकॉल’ (जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार) की व्यवस्था लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस तरह मतदाताओं को मतदान का अधिकार है, उसी तरह काम न करने वाले जनप्रतिनिधियों को हटाने का अधिकार भी उन्हें मिलना चाहिए।

चड्ढा ने कहा, “अगर देश का मतदाता अपने नेताओं को चुन सकता है तो उसे उन्हें काम न करने पर हटाने का हक भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ व्यवस्था मतदाताओं को अधिकार संपन्न बनाएगी।” उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में यदि कोई सांसद या विधायक चुने जाने के बाद काम नहीं करता, तो जनता के पास पांच साल तक इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘राइट टू रिकॉल’ नेताओं के खिलाफ हथियार नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं, जैसे कि जनप्रतिनिधि को हटाने की प्रक्रिया के लिए 35 से 40 प्रतिशत मतदाताओं के हस्ताक्षर अनिवार्य हों तथा निर्वाचित प्रतिनिधि को कम से कम 18 माह का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए।

चड्ढा ने दावा किया कि अमेरिका, स्विटजरलैंड और कनाडा समेत 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में ऐसी व्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में ‘राइट टू रिकॉल’ लागू है।

आप के ही सदस्य अशोक कुमार मित्तल ने प्रशासनिक लापरवाही से हो रहे हादसों का मुद्दा उठाया। उन्होंने नोएडा, दिल्ली और रोहिणी में खुले गड्ढों में गिरकर युवकों की मौत, इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों, जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत, झांसी मेडिकल कॉलेज में आग की घटना तथा फरीदाबाद में मेले के दौरान झूला गिरने की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम हैं और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करने वाला सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बाबूराम निषाद ने बुंदेलखंड के हमीरपुर में राष्ट्रीय श्रीअन्न प्रसंस्करण एवं निर्यात केंद्र स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज के उत्पादन के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी बुंदेलखंड में उपलब्ध है।

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल कंजर जनजाति का नाम बदलने की मांग करते हुए कहा कि समुदाय के लोग इस नाम से अपमानित महसूस करते हैं।

भाजपा के राधामोहन दास ने उन भारतीय नागरिकों के पासपोर्ट रद्द करने और उन्हें वापस बुलाने की मांग की, जो विदेश में बस गए हैं और भारत में रह रहे अपने वृद्ध अभिभावकों की देखभाल नहीं कर रहे हैं।

द्रमुक के पी. विल्सन ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ कथित अत्याचार का मुद्दा उठाते हुए संबंधित कानून को और अधिक कठोर बनाने की मांग की। जनता दल (यूनाइटेड) के खीरू महतो ने वन अधिनियम से जुड़ा विषय उठाया।

इसके अलावा, भाजपा के धनंजय भीमराव महादिक और नरहरि अमीन तथा तृणमूल कांग्रेस के रीताव्रता बनर्जी ने भी आसन की अनुमति से अपने-अपने मुद्दे सदन में उठाए।

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