लखनऊ, 9 फरवरी 2026। राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक चौक क्षेत्र में स्थित प्राचीन कोनेश्वर महादेव मंदिर अब अपने गौरवशाली अतीत के अनुरूप नए वैभव की ओर अग्रसर है। सदियों पुरानी आस्थाओं और रामायण काल से जुड़ी मान्यताओं को संजोए इस पौराणिक मंदिर के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा व्यापक योजना पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर के विकास पर एक करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि कोनेश्वर महादेव मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व इसे विशिष्ट बनाता है। उन्होंने कहा कि रामायण काल और भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण से जुड़ी मान्यताएं इस मंदिर को अत्यंत पवित्र और विशेष बनाती हैं। गोमती नदी के तट पर स्थित यह स्थल प्राचीन काल में कौण्डिन्य ऋषि का आश्रम था, जिसका उल्लेख अनेक धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
मंत्री ने बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, पेयजल सुविधा, सौंदर्यीकरण कार्य और विश्राम स्थल विकसित किए जाएंगे, जिससे दर्शनार्थियों को बेहतर अनुभव मिल सके।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता सीता को वन में छोड़कर लौटते समय शोक संतप्त लक्ष्मण गोमती तट पर स्थित इसी कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम में ठहरे थे। ऋषि के निर्देश पर लक्ष्मण ने आश्रम में स्थापित शिवलिंग का अभिषेक किया था। इस पौराणिक प्रसंग का उल्लेख महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में भी मिलता है। आश्रम में कोने में स्थापित शिवलिंग को पहले कौण्डिन्येश्वर महादेव कहा गया, जो कालांतर में कोनेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
सावन मास में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और दूर-दराज से शिवभक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
आसानी से पहुंचा जा सकता है मंदिर तक-
कोनेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचना अत्यंत सरल है। लखनऊ के प्रमुख परिवहन केंद्र चारबाग रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी और सिटी बस के माध्यम से मंदिर तक सहज रूप से पहुंचा जा सकता है। देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता।
वर्ष 2025 में पहुंचे लगभग 1.5 करोड़ पर्यटक-
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और अवधी व्यंजनों की समृद्ध परंपरा के संगम से लखनऊ ने वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप यूनेस्को ने हाल ही में लखनऊ को “क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी” का दर्जा प्रदान किया है।
बेहतर पर्यटक सुविधाओं, उन्नत कनेक्टिविटी और सुव्यवस्थित प्रबंधन के चलते वर्ष 2025 में लखनऊ में लगभग 1.5 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल रहे। यह आंकड़ा राजधानी की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और सांस्कृतिक आकर्षण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
कोनेश्वर महादेव मंदिर के विकास से न केवल लखनऊ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम मिलेगा, बल्कि यह स्थल पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान के साथ उभरेगा।
