देहरादून, 8 फरवरी । उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका के खुलासे की मांग को लेकर रविवार को देहरादून में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने महापंचायत का आयोजन किया। ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले परेड ग्राउंड के बाहर हुई इस महापंचायत में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग उठाई गई।
महापंचायत में अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह और मां सोनी देवी भी मौजूद रहे। इस दौरान चेतावनी दी गई कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर सीबीआई जांच में उनकी मांगों के अनुरूप प्रगति नहीं होती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
महापंचायत में सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों में अंकिता के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपे गए पत्र को ही सीबीआई जांच के लिए औपचारिक शिकायती पत्र माने जाने, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराए जाने तथा इस संबंध में पर्यावरणविद अनिल प्रकाश जोशी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी को रद्द किए जाने की मांग की गई।
इसके अलावा, हत्याकांड के बाद वनंत्रा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने की अनुमति देने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जांच पूरी होने तक पद से स्वयं हटने की मांग की गई। साथ ही भाजपा पदाधिकारियों दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार को भी जांच के दायरे में लाने की मांग उठी।
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को दिए पत्र में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘वीआईपी’ के खुलासे को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराने वाले अनिल प्रकाश जोशी से उनका कोई संपर्क नहीं रहा है।
महापंचायत को समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि न्याय की इस लड़ाई में जनभावना राजनीति से कहीं बड़ी है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड की जनता चाहती है कि हमारी बेटी के दोषियों को सजा मिले, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों।”
उत्तराखंड महिला मंच की प्रमुख कमला पंत ने कहा कि कथित ‘वीआईपी’ का खुलासा होने तक संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, भाकपा-माले के नेता इंद्रेश मैखुरी ने भी ‘वीआईपी’ का शीघ्र पर्दाफाश करने की मांग की।
महापंचायत में करीब 40 संगठनों ने हिस्सा लिया, जिनमें सामाजिक संगठनों के साथ ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दल भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारी ‘अंकिता को न्याय दिलाओ’, ‘वीआईपी कौन’ और ‘हत्यारों को बचाना बंद करो’ जैसे नारे लिखी तख्तियां और पोस्टर लेकर पहुंचे।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में पौड़ी जिले के वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता ने की थी। तीनों को सत्र न्यायालय उम्रकैद की सजा सुना चुका है।
हालांकि, हाल में अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर जारी वीडियो और कथित ऑडियो क्लिप के बाद मामला फिर से सुर्खियों में आ गया, जिसमें भाजपा के कथित ‘वीआईपी’ नेता की संलिप्तता का आरोप लगाया गया था। इसके बाद राज्य में व्यापक आंदोलन शुरू हुआ और नौ जनवरी को मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी।
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