बोले—तेज विकास और कम मुद्रास्फीति का दुर्लभ संयोग, युवा भारत हमारी सबसे बड़ी ताकत
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत आज विश्व में पैदा हो रहीं चुनौतियों के समाधान के लिए एक आशा की किरण बनकर उभरा है और देश विकास की नयी ऊंचाइयां छूते हुए लगातार युवा होता जा रहा है।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में बीते कुछ वर्षों के दौरान देश ने तेज गति से विकास किया है और सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “भारत आज विश्व में पैदा हो रहीं चुनौतियों के समाधान के लिए आशा की किरण बना हुआ है। हम केवल समस्याएं नहीं गिना रहे, बल्कि समाधान दे रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का तेज आर्थिक विकास और कम मुद्रास्फीति एक दुर्लभ संयोग है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात में बहुत कम देशों को नसीब है।
मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में मध्यम वर्ग, गरीबों, गांवों, किसानों, महिलाओं तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
उन्होंने कहा, “अभिभाषण में यह भी बताया गया है कि देश के नौजवान भारत के सामर्थ्य को किस तरह आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति विश्वास झलकता है, जो हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।”
कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का पहला चतुर्थांश पूरा हो चुका है और दूसरा चतुर्थांश भी उतना ही निर्णायक होना चाहिए, जैसा पिछली शताब्दी में रहा।
उन्होंने कहा, “विकसित भारत के निर्माण में यह दूसरा चतुर्थांश सामर्थ्यवान और तेज विकास वाला होगा। देशवासी महसूस कर रहे हैं कि हम एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। हमें न रुकना है, न थमना है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में भारत को कई अनुकूल परिस्थितियां एक साथ मिली हैं।
उन्होंने कहा, “जहां दुनिया के कई समृद्ध देश बुजुर्ग होते जा रहे हैं, वहीं भारत विकास की नयी ऊंचाइयां छूते हुए युवा होता जा रहा है। हमारे पास बढ़ती युवा आबादी है, जो एक बड़ा सकारात्मक संयोग है।”
मोदी ने कहा कि विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है और देश के युवाओं के पास संकल्प, सपने और सामर्थ्य तीनों मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय भारत को विश्व की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज वह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।
