कोलकाता, 5 फरवरी (एजेंसी )- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार को सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि देने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार को पहले राज्य में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने के “मनमाने” फैसले को वापस लेना होगा।
राज्यपाल के अभिभाषण पर विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा लगाए जा रहे उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा है कि राज्य सरकार सीमा पर बाड़ लगाने में बाधा डाल रही है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ सहित सभी केंद्रीय एजेंसियों को पहले ही भूमि आवंटित की जा चुकी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए बनर्जी ने कहा, “भूमि कोई समस्या नहीं है। आपको भूमि मिल जाएगी, लेकिन पहले BSF के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने के मनमाने नियम को बदलिए।”
बाड़ लगाने में कथित देरी, अवैध प्रवासन और बांग्लादेश के साथ पश्चिम बंगाल की लंबी खुली सीमा के प्रबंधन को लेकर केंद्र और तृणमूल कांग्रेस के बीच जारी जुबानी जंग के बीच मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी आई है।
मुख्यमंत्री ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वह यह नहीं बता रहे हैं कि राज्य सरकार अब तक कितनी जमीन केंद्र को आवंटित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि रेलवे से लेकर रक्षा प्रतिष्ठानों तक सभी केंद्रीय एजेंसियों को आवश्यक भूमि दी जा चुकी है।
भाजपा द्वारा बार-बार घुसपैठ का मुद्दा उठाए जाने पर सवाल खड़े करते हुए बनर्जी ने “सिर्फ सुरक्षा तक सीमित दृष्टिकोण” की आलोचना की। उन्होंने कहा, “वे सिर्फ एक शब्द समझते हैं—घुसपैठ। क्या युवा और नए मतदाताओं का नामांकन नहीं होगा?”
मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है।
इस पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि घुसपैठ के कारण पश्चिम बंगाल में जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहा है और दावा किया कि केंद्र ने कई बार बाड़ लगाने के लिए जमीन मांगी, लेकिन राज्य सरकार ने वह उपलब्ध नहीं कराई।
हालांकि, बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने “कई गृह मंत्री” देखे हैं और उन्हें शासन का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक तेवर दिखाते हुए भाजपा को चेतावनी दी कि वह राज्य में “कई सीटें गंवाएगी।”
घुसपैठ और रोहिंग्या से जुड़े आरोपों पर उन्होंने भाजपा को सबूत पेश करने की चुनौती देते हुए कहा, “क्या आपको एक भी रोहिंग्या मिला है? 2024 में इसी मतदाता सूची पर चुनाव हुए थे। अगर कोई समस्या थी, तो प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगिए।”
