आई-पैक छापेमारी मामले में ईडी की याचिका पोषणीय नहीं: बंगाल सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल सरकार ने राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल याचिका की पोषणीयता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने जवाबी हलफनामे में कहा है कि ईडी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि इसी प्रकार का मामला पहले से ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित है।

तृणमूल कांग्रेस नीत राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में दलील दी कि एक ही विषय पर दो संवैधानिक अदालतों के समक्ष समानांतर कार्यवाही नहीं चल सकती। इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि किसी केंद्रीय एजेंसी को उच्चतम न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दायर करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

यह मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब ईडी ने कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े एक मामले में आठ जनवरी को आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। ईडी का आरोप है कि इस तलाशी अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित राज्य सरकार की ओर से जांच में बाधा डाली गई।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने 15 जनवरी को इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। ईडी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य मशीनरी ने आई-पैक परिसरों पर छापेमारी में हस्तक्षेप किया और इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि ईडी की जांच में मुख्यमंत्री द्वारा कथित तौर पर बाधा डालना “बहुत गंभीर” मामला है। अदालत ने इस प्रश्न पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई थी कि क्या राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।

साथ ही, उच्चतम न्यायालय ने आई-पैक कार्यालय और आवास पर छापेमारी करने वाले ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक भी लगा दी थी।

अपने हलफनामे में पश्चिम बंगाल सरकार ने यह भी दावा किया कि ईडी के पास “व्यापक तलाशी और जब्ती” करने का अधिकार नहीं था और एजेंसी ने विशेषाधिकार प्राप्त संवाद (प्रिविलेज्ड कम्युनिकेशन) का उल्लंघन किया। राज्य सरकार का कहना है कि ईडी की कार्रवाई कानून की सीमाओं से बाहर जाकर की गई।

दूसरी ओर, ईडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर छापेमारी के दौरान जबरन आई-पैक परिसर में दाखिल हुईं और जांच से जुड़े “महत्वपूर्ण” दस्तावेज अपने साथ ले गईं।

इस मामले में अब उच्चतम न्यायालय को यह तय करना है कि ईडी की याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और क्या केंद्रीय एजेंसी द्वारा उठाए गए आरोपों पर आगे सुनवाई की जा सकती है।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *