प्रसंस्कृत खाद्य से जुड़े मिथकों से लड़ने के लिए विज्ञान-आधारित संचार जरूरी: चिराग पासवान

नयी दिल्ली। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को लेकर फैले मिथकों और गलत जानकारियों से निपटने के लिए विज्ञान पर आधारित संचार की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जिम्मेदार संवाद और सभी अंशधारकों की सहभागिता के जरिए ही भ्रामक प्रचार का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है।

एक सरकारी बयान के अनुसार, पासवान ने सोमवार को प्रसंस्कृत खाद्य से संबंधित भ्रामक प्रचार का मुकाबला करने के लिए गठित समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में समिति के सदस्य, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां और विभिन्न उद्योग संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, पोषण बढ़ाने, खाद्य बर्बादी को कम करने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए खाद्य प्रसंस्करण की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि ‘प्रसंस्कृत खाद्य’ को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं और मिथकों का समाधान वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित संचार के माध्यम से किया जाना चाहिए।

चिराग पासवान ने सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य जनसंचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया, ताकि एक संतुलित और तथ्यपरक सार्वजनिक राय बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार, उद्योग, नियामक संस्थाएं और अन्य अंशधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी सही, विश्वसनीय और वैज्ञानिक जानकारी देश के हर नागरिक तक पहुंचे, ताकि भ्रम की स्थिति को दूर किया जा सके।

खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने पिछली बैठक के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंशधारकों के साथ व्यापक परामर्श, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा और स्वीकृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) का देशव्यापी प्रचार किया गया है। उन्होंने सूचित और सार्थक सार्वजनिक चर्चा को मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

बैठक में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान जैसे प्रमुख नियामक और तकनीकी संस्थानों के शीर्ष अधिकारी एवं वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। एफएसएसएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रंजीत पुन्हानी ने भी बैठक में भाग लिया।

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