राज्यसभा: सपा सांसद जावेद अली खान ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्रता मानदंड में संशोधन की मांग की

नयी दिल्ली, 29 जनवरी । राज्यसभा में बृहस्पतिवार को समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने सरकार से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त राशन पाने वाले लाभार्थियों के लिए पात्रता मानदंड में संशोधन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा आय सीमा पुरानी हो चुकी है और इसके कारण लाखों लोगों के सामने राशन कार्ड रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए खान ने कहा कि वर्ष 2013 में लागू किया गया खाद्य सुरक्षा कानून कोविड-19 महामारी के दौरान करोड़ों गरीबों के लिए वरदान साबित हुआ था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कानून लागू हुए 13 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पात्रता से जुड़े मानदंडों में अब तक कोई संशोधन नहीं किया गया है।

सपा सांसद ने बताया कि जब 2013 में यह अधिनियम पारित किया गया था, तब ग्रामीण क्षेत्रों में दो लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों और शहरी क्षेत्रों में तीन लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों को पात्र माना गया था। उन्होंने कहा कि बीते 13 वर्षों में महंगाई में भारी वृद्धि हुई है और आम लोगों की आय में भी इजाफा हुआ है।

खान ने कहा, “इस अवधि में सांसदों के वेतन तक में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन खाद्य सुरक्षा कानून के तहत पात्रता मानदंड जस का तस बना हुआ है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आय सीमा में संशोधन नहीं किया गया तो केवल उत्तर प्रदेश में ही करीब 17 लाख राशन कार्ड रद्द किए जा सकते हैं।

इसी शून्यकाल में माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने देश के विमानन क्षेत्र में दो कंपनियों के वर्चस्व पर चिंता जताते हुए कहा कि एकाधिकार की स्थिति के कारण हवाई यात्रियों का शोषण हो रहा है। उन्होंने सरकार से एयरलाइनों की “शोषणकारी मूल्य निर्धारण प्रथाओं” को नियंत्रित करने के लिए अपने नियामक अधिकारों का उपयोग करने का आग्रह किया।

ब्रिटास ने कहा कि दो कंपनियों के एकाधिकार और सरकार द्वारा जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के कारण यात्रियों के शोषण का मुद्दा बार-बार सामने आ रहा है। उन्होंने प्रवासी मलयाली यात्रियों की कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। इंडिगो से जुड़ी हालिया समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने अनिच्छा से कदम उठाए।

अंतरराष्ट्रीय तुलना करते हुए ब्रिटास ने कहा कि अमेरिका जैसे पूंजीवादी देश में भी किसी एक घरेलू विमानन कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से अधिक नहीं है, जबकि चीन में तीन सबसे बड़ी एयरलाइनों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक नहीं है। इसके विपरीत भारत में केवल दो कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत है।

उन्होंने हाल में हुई कुछ विमान दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विमानन क्षेत्र से जुड़े सभी मुद्दों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।

शून्यकाल के दौरान ही भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के. लक्ष्मण ने शराब, तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों के अप्रत्यक्ष विज्ञापनों पर सख्त नियमन की मांग की। उन्होंने क्रिकेटरों समेत फिल्मी सितारों और अन्य मशहूर हस्तियों से टेलीविजन पर ऐसे अप्रत्यक्ष विज्ञापनों के माध्यम से इन उत्पादों का प्रचार न करने की अपील की।

लक्ष्मण ने कहा कि परिवारों, विशेषकर छोटे बच्चों द्वारा देखे जाने वाले कार्यक्रमों के दौरान अप्रत्यक्ष विज्ञापनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है, जिसे दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे मिलकर देखते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अधिक दर्शकों वाले आयोजनों के दौरान प्रसारित होने वाले विज्ञापन संवेदनशील मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं और इसलिए इन पर कड़े नियामक कदम उठाने की आवश्यकता है।

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