नयी दिल्ली, 29 जनवरी । केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बृहस्पतिवार को बताया कि देशभर की 97 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में भारतनेट परियोजना के तहत ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने कहा कि भारतनेट विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण दूरसंचार परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य चरणबद्ध तरीके से देश की सभी ग्राम पंचायतों को डिजिटल रूप से जोड़ना है।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए सिंधिया ने कहा कि भारतनेट-एक और भारतनेट-दो परियोजनाओं के तहत चिन्हित लगभग 2,22,000 ग्राम पंचायतों में से 2,15,000 ग्राम पंचायतों को पहले ही कनेक्टिविटी से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा, “इसका अर्थ है कि लगभग 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।”
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि शत-प्रतिशत कवरेज अब तक हासिल न हो पाने के पीछे कुछ क्षेत्रों की भौगोलिक कठिनाइयां, दुर्गम इलाकों की स्थिति और कुछ स्थानों पर वामपंथी उग्रवाद जैसी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि शेष करीब तीन प्रतिशत यानी लगभग 7,000 ग्राम पंचायतों में अभी तक कनेक्टिविटी नहीं पहुंच पाई है, क्योंकि ये क्षेत्र अत्यंत पहाड़ी, दूरस्थ और सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं।
सिंधिया ने यह भी बताया कि भारतनेट परियोजना के शुरुआती चरण में ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way) प्राप्त करने में गंभीर समस्याएं सामने आई थीं। इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार ने इस संबंध में राजपत्रित अधिसूचना जारी की, जिससे दूरसंचार अवसंरचना के विस्तार में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
उन्होंने कहा कि ‘राइट ऑफ वे’ का अर्थ सार्वजनिक और निजी संपत्तियों पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा नेटवर्क और बुनियादी ढांचे की स्थापना, संचालन और रखरखाव से संबंधित अधिकारों और नियमों से है। अब राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ‘राइट ऑफ वे’ देने में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न की जाए।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारतनेट परियोजना को 25 अक्टूबर 2011 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का क्रियान्वयन भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) के माध्यम से किया जा रहा है, जो एक विशेष प्रयोजन इकाई है और जिसकी स्थापना 25 फरवरी 2012 को भारतीय कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी।
उन्होंने आगे बताया कि 30 अप्रैल 2016 को दूरसंचार आयोग ने भारतनेट परियोजना को तीन चरणों में लागू करने की स्वीकृति दी थी। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण भारत को उच्च गति इंटरनेट से जोड़कर डिजिटल सेवाओं, ई-गवर्नेंस, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों को सशक्त बनाना है।
