भारतीय परंपराओं में निहित हैं विश्व की समस्याओं का समाधान: अमित शाह

गृह मंत्री ने कहा—मातृभाषा से जुड़ाव संस्कृति और पहचान को करता है मजबूत, आत्मनिर्भर भारत का मूल मंत्र है स्वदेशी

हरिद्वार, 22 जनवरी । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि विश्व आज जिन जटिल समस्याओं से जूझ रहा है, उनका समाधान भारतीय परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा कि जो भारत और उसकी संस्कृति को सही मायने में समझता है, वह जानता है कि मानवता के सामने खड़ी अधिकांश चुनौतियों का उत्तर भारतीय दर्शन में मौजूद है।

यह बात गृह मंत्री ने हरिद्वार में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा,
“जो भारत और उसकी संस्कृति को समझता है, वह यह भी समझता है कि विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान भारतीय परंपराओं में निहित है।”

अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि, विशेष रूप से सप्तर्षि भूमि हरिद्वार, हजारों वर्षों की तपस्या और साधना की ऊर्जा से ओतप्रोत है और यहां आकर आध्यात्मिक चेतना का विशेष अनुभव होता है।

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के योगदान को किया स्मरण

शांतिकुंज के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के योगदान का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि भारत उनके उपकारों से कभी ऋणमुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आचार्य ने गायत्री मंत्र को जन-जन तक सुलभ बनाया, वैश्विक मानवतावाद की अवधारणा को सशक्त किया और वैज्ञानिक अध्यात्मवाद को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।

अमित शाह ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा का सरल लेकिन प्रभावशाली सूत्र “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” राष्ट्र परिवर्तन की कुंजी है। उन्होंने कहा कि गायत्री महामंत्र केवल संस्कृत का मंत्र नहीं, बल्कि यह साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला एक जीवन मंत्र है।

उन्होंने कहा कि आचार्य ने सनातन धर्म में समय के साथ आई विकृतियों को दूर करते हुए आध्यात्मिकता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा और समानता, संस्कृति, एकता तथा अखंडता जैसे मूल्यों को सुदृढ़ किया।
“व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण” के विचार को व्यवहार में उतारने का मार्ग पंडित श्रीराम शर्मा ने प्रशस्त किया, ऐसा गृह मंत्री ने कहा।

भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर

अमित शाह ने कहा कि बीते दस वर्षों में देश की कार्य-संस्कृति और सोच में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आया है। आज भारत को उसकी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और मूल्यों के कारण विश्व में सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद और अरविंद घोष जैसे युगपुरुषों के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के उत्कर्ष से ही मानवता का उत्कर्ष सुनिश्चित होगा।

मुख्यमंत्री धामी और अन्य वक्ताओं के विचार

इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गायत्री परिवार एक वटवृक्ष के समान है, जो आध्यात्मिक चेतना का प्रचार-प्रसार करते हुए समाज को शांति और सकारात्मकता की छाया प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को नए स्वरूप में पुनः स्थापित कर रहा है और सनातन संस्कृति का यह विराट संदेश विश्व तक पहुंचे, इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पांड्या ने कहा कि गायत्री परिवार का मूल दर्शन समाज में रहकर मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान के कार्यों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान वेद, उपनिषद और गीता से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक तकनीक को अपनाकर शिक्षा, प्रशिक्षण और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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