संभल (उप्र), 21 जनवरी । संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के स्थानांतरण के विरोध में बुधवार को चंदौसी में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया। चंदौसी जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अधिवक्ताओं ने चंदौसी कोतवाली के पास सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस तबादले को “न्याय की हत्या” करार दिया और इसे एक अच्छे न्यायाधीश की पदावनति बताया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि सीजेएम विभांशु सुधीर ने संभल हिंसा मामले में निष्पक्ष और साहसिक भूमिका निभाई थी, लेकिन इसी कारण उनका स्थानांतरण किया गया। उल्लेखनीय है कि सुधीर ने नौ जनवरी को संभल हिंसा मामले में तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी सहित 15–20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। इस मामले में आरोप है कि हिंसा के दौरान अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने एक युवक को गोली मार दी थी।
जिला सत्र न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश यादव ने पत्रकारों से कहा, “सीजेएम को वापस संभल लाया जाना चाहिए। विभांशु सुधीर जिले की न्याय व्यवस्था के लिए बेहतरीन काम कर रहे थे। उनके कार्यकाल में कई मामलों में आठ-आठ दिन के भीतर फैसले हुए। मौजूदा एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ आदेश देने के बाद ही उनका तबादला किया गया है।”
अधिवक्ता रोशन सिंह यादव ने भी इस स्थानांतरण को गलत बताते हुए कहा, “अच्छे न्यायाधीश को सजा देने का अधिकार किसी को नहीं है। मैं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मांग करता हूं कि सीजेएम का स्थानांतरण तत्काल रद्द किया जाए। यह स्पष्ट रूप से सरकार के दबाव में किया गया कदम है।”
गौरतलब है कि मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जारी स्थानांतरण सूची में संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर में दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) के पद पर स्थानांतरित किया गया है। वहीं, चंदौसी के दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह को संभल का नया सीजेएम नियुक्त किया गया है।
इससे पहले आदित्य सिंह, दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) के रूप में कार्यरत रहते हुए, संभल के श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद मामले में मस्जिद के सर्वेक्षण का आदेश दे चुके हैं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कुल 14 न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण किए थे, जिनमें संभल के सीजेएम का तबादला भी शामिल है। सीजेएम विभांशु सुधीर के स्थानांतरण को लेकर उठे इस विरोध के बाद न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
