शिक्षक समायोजन के खिलाफ उबाल, बीएसए कार्यालय पर सैकड़ों शिक्षकों का प्रदर्शन


अटेवा सहित कई संगठनों का समर्थन, फैसला वापस न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

शाहजहाँपुर। जनपद में किए गए अन्तः जनपदीय शिक्षक समायोजन एवं स्थानांतरण के विरोध में सोमवार को संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति (बेसिक) के नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्ध सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों ने सहभागिता की।

धरना सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ, जहां शिक्षकों ने समायोजन प्रक्रिया को असंवैधानिक, नियमविरुद्ध और न्यायालयी आदेशों के खिलाफ बताते हुए जमकर नारेबाजी की। इसके उपरांत समिति ने बीएसए के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जनपद में किए गए सभी समायोजन और स्थानांतरण तत्काल निरस्त करने की मांग की।

शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल में किया गया समायोजन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना है। उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापकों से लेकर वरिष्ठ और कनिष्ठ शिक्षकों तक का समायोजन ‘लास्ट इन, फर्स्ट आउट’ सिद्धांत के आधार पर किया गया है, जबकि इस सिद्धांत को न्यायालय पहले ही असंवैधानिक घोषित कर चुका है।

संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2024 के न्यायालयी निर्णय की गलत व्याख्या कर उसे स्थानांतरण से जोड़ दिया गया, जबकि वह निर्णय केवल वेतन और तथ्यात्मक सत्यापन से संबंधित था। नेताओं ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली, 1981 के नियम-21 का भी उल्लंघन है, जिसमें शिक्षक की सहमति के बिना स्थानांतरण का कोई प्रावधान नहीं है।

धरने के दौरान यह भी गंभीर आरोप लगाए गए कि 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग, गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षक-शिक्षिकाओं और महिला शिक्षिकाओं को भी समायोजन से नहीं छोड़ा गया, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ है। शिक्षामित्रों की गणना को भी अवैध बताते हुए कहा गया कि न्यायालय पहले ही उन्हें सहायक अध्यापकों के समान मानने से इंकार कर चुका है।

शिक्षक नेताओं ने 14 नवंबर 2025 के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य शिक्षक-विहीन और एकल शिक्षक विद्यालयों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती था, लेकिन समायोजन के बाद दोबारा स्थानांतरण कर कई विद्यालयों को फिर से एकल शिक्षक की स्थिति में पहुंचा दिया गया है।

समिति ने पूरी प्रक्रिया को गोपनीय और अपारदर्शी बताते हुए आरोप लगाया कि न तो समायोजन से संबंधित नियमावली सार्वजनिक की गई और न ही सरप्लस शिक्षकों तथा शिक्षक-विहीन या एकल शिक्षक विद्यालयों की सूची जारी की गई।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें उठाई गईं—

  • जनपद शाहजहाँपुर में किए गए सभी अन्तः जनपदीय समायोजन व स्थानांतरण तत्काल रद्द किए जाएं

  • समायोजन से संबंधित नियमावली और मापदंड सार्वजनिक किए जाएं

  • सरप्लस तथा शिक्षक-विहीन/एकल शिक्षक विद्यालयों की सूची जारी की जाए

  • नियमों और न्यायालयी आदेशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए

धरने में मुनीश मिश्र, धर्मेंद्र शर्मा, अनीस अहमद, विनीत गंगवार, नफीस खां, राजकमल आर्य, संजीव गंगवार सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।

शिक्षक नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि समायोजन का फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को जिले से बढ़ाकर प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

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