ठाणे, 12 जनवरी । अंबरनाथ नगर परिषद (एएमसी) में पिछले एक सप्ताह से चले आ रहे सियासी घमासान के बाद सोमवार को शिवसेना समर्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पार्षद सदाशिव हेंडर पाटिल को उपाध्यक्ष चुन लिया गया। इस चुनाव के साथ ही परिषद में सत्ता संतुलन को लेकर जारी खींचतान पर फिलहाल विराम लग गया, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इसे एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
परिषद की आम सभा की बैठक के दौरान उपाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव से पहले भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे सदन में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि बाद में मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
मतदान में सदाशिव पाटिल को 32 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा के उम्मीदवार प्रदीप पाटिल को 28 वोट मिले। इस जीत के साथ शिवसेना समर्थित राकांपा खेमे ने परिषद में अपना दबदबा साबित किया। उपाध्यक्ष पद के चुनाव के अलावा नगर परिषद के लिए पांच नामित सदस्यों का भी चयन किया गया।
चुनाव से पहले सदन का माहौल खासा तनावपूर्ण रहा। भाजपा के कुछ नाराज पार्षदों को चप्पलें लहराते हुए और शिवसेना समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए देखा गया, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हुई।
गौरतलब है कि अंबरनाथ नगर परिषद में राजनीतिक समीकरण हाल के महीनों में तेजी से बदले हैं। शिवसेना के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को चुनौती देने के उद्देश्य से भाजपा, अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और स्थानीय कांग्रेस सदस्यों ने मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (एवीए) का गठन किया था। इसके बाद कांग्रेस के 12 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और तेज हो गई थी।
हालांकि बाद में राकांपा ने भाजपा से नाता तोड़ते हुए शिवसेना से हाथ मिला लिया, जिससे परिषद में शिवसेना समर्थित गुट को बहुमत हासिल हो गया। पिछले महीने हुए नगर परिषद चुनावों के बाद से भाजपा और शिवसेना के बीच सत्ता संघर्ष लगातार जारी है, जबकि दोनों ही दल राज्य सरकार में सहयोगी हैं।
पिछले महीने हुए एएमसी चुनावों में भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल को परिषद अध्यक्ष चुना गया था, लेकिन उपाध्यक्ष पद के चुनाव ने भाजपा और शिवसेना के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया।
वर्तमान में 60 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना के 27 पार्षद, भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, राकांपा के चार और दो निर्दलीय पार्षद हैं। उपाध्यक्ष पद पर सदाशिव पाटिल की जीत के बाद परिषद की राजनीति में शिवसेना समर्थित गुट की स्थिति और मजबूत हुई है।
