लखनऊ, 12 जनवरी । कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि प्रियंका गांधी वाद्रा एक राष्ट्रीय नेता हैं और उनकी भूमिका केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वायनाड से लोकसभा सदस्य प्रियंका गांधी पार्टी के राष्ट्रीय अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाती रहेंगी, हालांकि उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस के कार्यक्रमों और आंदोलनों में उनकी प्रमुख भागीदारी जारी रहेगी।
प्रियंका गांधी के जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के लिए 100 दिवसीय महत्वाकांक्षी अभियान की घोषणा के बाद अजय राय ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी राष्ट्रीय राजनीति का अहम चेहरा हैं और पार्टी की व्यापक रणनीति में उनकी भूमिका बहुआयामी है। साथ ही, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अजय राय ने कहा, “प्रियंका गांधी एक राष्ट्रीय नेता हैं और उन्हें केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। लेकिन यह भी सच है कि वह प्रदेश में पार्टी के सभी अभियानों में प्रमुख रूप से भागीदारी करती रहेंगी। उत्तर प्रदेश और प्रियंका गांधी—दोनों ही कांग्रेस की रणनीति में महत्वपूर्ण हैं।”
गौरतलब है कि हाल के दिनों में यह अटकलें तेज थीं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रियंका गांधी वाद्रा को उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी और निर्णायक भूमिका सौंपी जा सकती है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राय ने कहा कि पार्टी नेतृत्व सामूहिक रूप से रणनीति तय करता है और प्रियंका गांधी का कद राष्ट्रीय स्तर का है।
प्रियंका गांधी को वर्ष 2019 में कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया था और उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा गया था। उन्होंने “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” जैसे अभियानों का नेतृत्व किया और 2022 के विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का ऐतिहासिक फैसला लिया। हालांकि, उस चुनाव में कांग्रेस को मात्र दो सीटों पर जीत मिली थी।
अजय राय ने बताया कि घोषित 100 दिवसीय अभियान के तहत पहली रैली 24 जनवरी को सीतापुर में आयोजित की जाएगी। इसके बाद प्रदेश भर में लगभग 30 रैलियां होंगी और कार्यक्रम का समापन लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान में एक विशाल रैली के साथ किया जाएगा।
इससे पहले कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने प्रियंका गांधी के जन्मदिन के अवसर पर लखनऊ में पार्टी की 100 दिन की कार्ययोजना की औपचारिक घोषणा की। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मनरेगा को कमजोर करने जैसे कदमों के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
