रायपुर, 2 जनवरी । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी।
ईडी के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उच्च न्यायालय ने चैतन्य बघेल को दोनों मामलों में जमानत प्रदान की है। चैतन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) ने कथित शराब घोटाले के सिलसिले में मामले दर्ज किए थे।
भूपेश बघेल ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे “सत्य की जीत” बताया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। यह बहुत खुशी की बात है कि चैतन्य को जमानत मिल गई है।”
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि चैतन्य को पप्पू बंसल के बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, जो फरार है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें उन्हें लगातार परेशान करने में लगी हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
ईडी ने 18 जुलाई को कथित घोटाले की धनशोधन जांच के सिलसिले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। इससे पहले, राज्य की एजेंसी ने 24 सितंबर को उन्हें गिरफ्तार किया था, और तब वह पहले से ही जेल में थे।
केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान कथित शराब घोटाला हुआ। ईडी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और शराब ‘सिंडिकेट’ के लाभार्थियों ने करोड़ों रुपये की कमाई की।
एजेंसियों ने चैतन्य बघेल पर आरोप लगाया कि वह कथित सिंडिकेट का मुखिया था और घोटाले से मिली लगभग 1,000 करोड़ रुपये अपने नियंत्रण में रखे थे। एसीबी/ईओडब्ल्यू के अनुसार, चैतन्य ने कथित अपराध की कमाई का प्रबंधन किया और अपने हिस्से के रूप में 200-250 करोड़ रुपये अर्जित किए। जांच से पता चला है कि कुल कथित घोटाले की कमाई 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
