आरजी कर आंदोलन के प्रमुख चेहरे अनिकेत महतो ने डब्ल्यूबीजेडीएफ से दिया इस्तीफा

आरजी कर आंदोलन के प्रमुख चेहरे अनिकेत महतो ने डब्ल्यूबीजेडीएफ से दिया इस्तीफा

कोलकाता, 2 जनवरी । पश्चिम बंगाल के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में वर्ष 2024 में एक महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के विरोध में चले आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अनिकेत महतो ने ‘वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम’ (डब्ल्यूबीजेडीएफ) के न्यासी मंडल से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम को आरजी कर मामले से जुड़े न्याय आंदोलन के लिए एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

डब्ल्यूबीजेडीएफ का गठन नौ अगस्त 2024 को उस जघन्य घटना के एक दिन बाद किया गया था, जिसमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला स्नातकोत्तर प्रशिक्षु (पीजीटी) डॉक्टर के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी। यह मंच ‘अभया’ नाम से पहचानी गई पीड़िता के लिए न्याय की मांग को लेकर उभरा था और राज्यभर में डॉक्टरों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहा था।

अनिकेत महतो ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 37 सदस्यीय डब्ल्यूबीजेडीएफ कार्यकारी समिति के गठन को लेकर उनके और अन्य न्यासियों के बीच गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के गठन की प्रक्रिया अलोकतांत्रिक थी और इसमें न्यासी मंडल के सभी सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया गया।

महतो ने कहा कि यह गठन न केवल “अलोकतांत्रिक और अनुचित” था, बल्कि इससे आरजी कर पीड़िता के परिजनों के साथ भी अन्याय हुआ है। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया संस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को कमजोर करती है, न कि उसे मजबूत करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘अभया’ के लिए न्याय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले चिकित्सकों और अन्य लोगों के प्रति सत्तारूढ़ दल और राज्य का प्रतिष्ठान प्रतिशोध की भावना से काम कर रहा है। महतो ने कहा, “यह मंच अपने शुरुआती संघर्ष की गति को बनाए रखने में विफल रहा। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त धमकी भरे माहौल का मुद्दा अब हाशिये पर चला गया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा मंच में उन्हें अब कोई प्रासंगिकता नजर नहीं आती, जबकि उन्होंने कई बार अपनी चिंताओं और विचारों को मंच के भीतर उठाने का प्रयास किया था।

अनिकेत महतो ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कई कनिष्ठ चिकित्सकों का तबादला दूरदराज के जिला अस्पतालों में कर दिया। उन्होंने बताया कि जहां डॉ. देबाशीष हलदर और डॉ. अशफाकुल्ला नैय्या ने अपने तबादलों को स्वीकार कर लिया, वहीं उन्होंने स्वयं इन आदेशों को पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय और बाद में उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी।

महतो के इस्तीफे को आरजी कर आंदोलन के भविष्य और डॉक्टरों के संगठित संघर्ष पर असर डालने वाले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

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