आईटीसी में भारी गिरावट से शेयर बाजार लगभग स्थिर, एफआईआई बिकवाली का दबाव

मुंबई, एक जनवरी । वर्ष 2026 के पहले कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार लगभग स्थिर रुख के साथ बंद हुए। दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के शेयरों में भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि, चुनिंदा शेयरों में खरीदारी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के समर्थन से बड़ी गिरावट टल गई। विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की सीमित भागीदारी और रुपये में कमजोरी के चलते बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रहा।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में 32 अंक यानी 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 85,188.60 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 85,451.70 अंक के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि इसका निचला स्तर 85,101.52 अंक रहा। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 सूचकांक 16.95 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ 26,146.55 अंक पर बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह सत्र निवेशकों की अनिर्णय की स्थिति को दर्शाता है। एसबीआई सिक्योरिटीज में तकनीकी एवं डेरिवेटिव शोध के प्रमुख सुदीप शाह के अनुसार, यह 17 सितंबर 2025 के बाद का सबसे संकीर्ण दैनिक कारोबार दायरा रहा, जिससे यह साफ है कि खरीदारों और विक्रेताओं दोनों की भागीदारी सीमित रही।

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में आईटीसी के शेयरों में 9.69 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर भी नुकसान में रहे। दूसरी ओर, एनटीपीसी, इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टूब्रो और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली।

तंबाकू और सिगरेट कंपनियों के शेयरों पर विशेष दबाव रहा। एक फरवरी से तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर लगाए जाने की अधिसूचना जारी होने के बाद इस क्षेत्र में बिकवाली तेज हो गई। गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों में 17.09 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

व्यापक बाजार में मझोली कंपनियों का बीएसई मिडकैप सूचकांक 0.27 प्रतिशत चढ़ा, जबकि स्मालकैप सूचकांक में 0.02 प्रतिशत की हल्की गिरावट रही। क्षेत्रवार आधार पर एफएमसीजी सूचकांक में सबसे ज्यादा 2.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,597 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 6,759 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।

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