‘फोकट प्रश्न मत पूछो,क्या घंटा होकर आया’, इंदौर पानी कांड पर मंत्री विजयवर्गीय का निर्लज्ज जवाब, अब मांगी माफी

दूषित पेयजल संकट : विजयवर्गीय ने मीडिया के सामने आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल किया, बाद में खेद जताया

इंदौर। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में दूषित पेयजल से फैले डायरिया प्रकोप को लेकर उस समय विवादों में घिर गए, जब उन्होंने मीडिया के सवाल पर कैमरे के सामने आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल कर दिया। यह घटना बुधवार देर रात की है, जब मंत्री अपने ही विधानसभा क्षेत्र के भागीरथपुरा इलाके में डायरिया से प्रभावित हालात का जायजा लेने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान एक टीवी पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल ने राजनीतिक और मीडिया जगत में नई बहस छेड़ दी।

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण डायरिया फैलने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से अब तक चार लोगों की मौत हुई है और 212 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय निवासियों का दावा है कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है और यह आंकड़ा 10 के पार जा चुका है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में स्वास्थ्य और जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर आपात कदम उठाने का दावा किया है।

इसी बीच, एनडीटीवी के पत्रकार अनुराग द्वारी ने मंत्री विजयवर्गीय से सवाल किया कि प्रभावित लोगों द्वारा निजी अस्पतालों में कराए गए इलाज के बिलों का भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया और इलाके में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी। इस सवाल पर मंत्री असहज नजर आए लेकिन जैसे ही निजी अस्पतालों के बिल के रिफंड और इलाके में सुरक्षित पानी की उपलब्धता पर सवाल उठा, उनका लहजा अचानक बदल गया। कैमरों के सामने उन्होंने कहा, “फोकट प्रश्न मत पूछो,” और इसके बाद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया। पत्रकार को उन्होंने कहा कि, ”क्या-क्या घंटा होकर आए हो” यह पूरा वाकया कैमरे में कैद हो गया और कुछ ही घंटों में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वीडियो में मंत्री को पत्रकार के सवाल को खारिज करने के लिए अनुचित भाषा का इस्तेमाल करते हुए सुना जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे सत्ता का अहंकार बताते हुए मंत्री पर तीखा हमला बोला।

विवाद बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर अपने शब्दों के लिए खेद जताया। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित इलाके में हालात सुधारने में जुटी है। मंत्री ने यह भी कहा कि दूषित पानी से उनके अपने लोग पीड़ित हैं और कुछ लोगों की जान भी चली गई है। गहरे दुख और तनाव की स्थिति में उनके मुंह से गलत शब्द निकल गए, जिसके लिए उन्होंने माफी मांगी।

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विवादित वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि दूषित पानी से मौतों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। उन्होंने भाजपा नेताओं पर संवेदनहीन और अहंकारी होने का आरोप लगाया तथा मुख्यमंत्री मोहन यादव से नैतिक आधार पर विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगने की मांग की।

उधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही इस घटना को “आपात स्थिति” करार दे चुके हैं और दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद दी जा रही है।

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