सौंदर्यीकरण से निखरेगा 87 वर्ष पुराना रविदास मंदिर, धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

लखनऊ (RNN)। राजधानी के कानपुर रोड स्थित बारा बिरवा क्षेत्र का ऐतिहासिक रविदास मंदिर बारा बिरवा अब भव्य और आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने मंदिर परिसर के व्यापक सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास की योजना पर कार्य तेज कर दिया है। इस परियोजना पर कुल 80.27 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे, जिनमें से 60 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण तैयार किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक सार्वजनिक शौचालय, सिविल और प्लंबिंग कार्यों के साथ फायर सेफ्टी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही यात्रियों के ठहरने हेतु डॉरमेट्री सहित टूरिस्ट रेस्ट रूम का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।

मंदिर परिसर में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए 10 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिशा-सूचक साइन बोर्ड, बैठने के लिए बेंच और स्वच्छता बनाए रखने हेतु पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, इन व्यवस्थाओं से न केवल दर्शन व्यवस्था सुगम होगी, बल्कि परिसर का समग्र वातावरण भी अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बनेगा।

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि बारा बिरवा का यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संत परंपरा से जुड़े पवित्र स्थलों के संरक्षण और उनके पर्यटन विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मंदिर के आधुनिकीकरण से लखनऊ के धार्मिक पर्यटन मानचित्र को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

संत शिरोमणि गुरु रविदास की स्मृतियों से जुड़ा यह मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। यहां वर्ष भर भक्तों की आवाजाही बनी रहती है, जबकि रविदास जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित कर देते हैं। मंदिर का संचालन संत रविदास सेवा समिति द्वारा किया जाता है, जो धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक समरसता के संदेश को भी आगे बढ़ाती रही है।

पर्यटन विभाग का मानना है कि सुनियोजित और समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण होने पर यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करेगा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, परियोजना पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र राजधानी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल होगा और श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

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