भुवनेश्वर, 23 जनवरी । उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हर भारतीय को देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोगों के महान बलिदानों को पहचानना और उनका सम्मान करना चाहिए।
ओडिशा की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे उपराष्ट्रपति ने कटक में आयोजित ‘पराक्रम दिवस’ समारोह को संबोधित करते हुए नेताजी के निडर नेतृत्व, अदम्य साहस और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस का जीवन ‘पराक्रम’ के वास्तविक अर्थ का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को साहस, बलिदान और राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा देता रहेगा।
उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम में प्रदर्शित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2021 में नेताजी की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ घोषित कर प्रधानमंत्री ने उन्हें उचित सम्मान दिया। उन्होंने कहा, “विचारों में मतभेद हो सकते हैं और आज़ादी की लड़ाई के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हर भारतीय का दायित्व है कि वह महान बलिदानों को स्वीकार करे और उनका सम्मान करे।”
राधाकृष्णन ने याद दिलाया कि वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के रॉस द्वीप का नाम बदलकर ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप’ किया था, जो स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की निर्णायक कार्यशैली और राष्ट्र की सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता ‘पराक्रम’ की भावना को दर्शाती है। उपराष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि नेताजी द्वारा ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ का गठन महात्मा गांधी के विरोध में नहीं, बल्कि औपनिवेशिक शासन से लड़ने के लिए एक अलग दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता था।
कटक में नेताजी के आगमन को याद करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि उस समय महात्मा गांधी निर्विवाद नेता थे, लेकिन नेताजी ने साहसपूर्वक अपने विचार रखे, जो उनके महान नेतृत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ‘पराक्रम’ केवल नेताजी की स्मृति नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए साहस के साथ कार्य करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेताजी का संघर्ष आज भी भारतीयों में देशभक्ति की भावना को जागृत करता है। उन्होंने कहा, “मेरे हृदय में देशभक्ति की पहली चिंगारी सुभाष चंद्र बोस के जीवन को पढ़ने के बाद ही जगी थी।”
इससे पहले उपराष्ट्रपति ने कटक में नेताजी के जन्मस्थान पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी भी उपस्थित थे। बाद में उन्होंने एक डाक टिकट संग्रह दीर्घा और जिला संस्कृति भवन का उद्घाटन किया तथा पराक्रम दिवस समारोह में स्वतंत्रता सेनानी मायाधर मल्लिक और विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) बीएस सिंह देव को सम्मानित किया।
उपराष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि राधाकृष्णन ने नागरिकों से नेताजी के मजबूत, आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
