स्वाधीनता के बाद नेहरू काल में पाश्चात्य प्रभाव वाली नीतियां बनीं, मोदी सरकार कर रही ‘यूटर्न’: अमित शाह

देहरादून, 20 जनवरी । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि देश की स्वाधीनता के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में पाश्चात्य विचारों से प्रभावित होकर नीतियां बनाई जा रही थीं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उन नीतियों पर अब तेजी से ‘यूटर्न’ लगाया जा रहा है।

ऋषिकेश में गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक का विमोचन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि ‘कल्याण’ पत्रिका ने अंग्रेजों के शासनकाल से लेकर आजादी के बाद तक हर दौर में हिंदू संस्कृति और सनातन चेतना के संरक्षण का कार्य किया है। उन्होंने पत्रिका द्वारा प्रकाशित विशेषांकों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1950 में हिंदू संस्कृति पर केंद्रित अंक ऐसे समय में प्रकाशित हुआ, जब देश की शिक्षा, विदेश, रक्षा और व्यापार नीतियां पश्चिमी विचारधारा से प्रभावित होकर गढ़ी जा रही थीं।

गृह मंत्री ने कहा कि उस दौर में ‘कल्याण’ ने बिना किसी राजनीतिक वक्तव्य के यह संदेश दिया कि स्वतंत्र भारत की नीतियों का आधार भारतीय संस्कृति और परंपराएं होनी चाहिए, न कि पाश्चात्य सोच। उन्होंने कहा कि आज जब ‘कल्याण’ का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है, तब जिन नीतियों में बदलाव की आवश्यकता थी, उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तेजी से लागू किया जा रहा है और सांस्कृतिक मूल्यों को नीति निर्माण के केंद्र में रखा जा रहा है।

अमित शाह ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश के युवाओं में बड़ा गुणात्मक परिवर्तन देखने को मिला है और हिंदू संस्कृति तथा सनातन परंपरा का पुनर्जागरण हुआ है। उन्होंने कहा कि साढ़े पांच सौ वर्षों बाद रामलला की भव्य राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई है और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर आज पूरे देश को यह संदेश दे रहा है कि आस्था की शक्ति विध्वंस से कहीं अधिक बड़ी होती है।

उन्होंने बताया कि सोमनाथ मंदिर को तोड़े जाने के एक हजार वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार पूरे वर्ष को ‘सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष’ के रूप में मनाने जा रही है। शाह ने कहा कि मंदिर को 16 बार तोड़ा गया, लेकिन उसे तोड़ने वाले इतिहास में विलुप्त हो गए, जबकि मंदिर की ध्वजा आज भी शान से फहरा रही है।

गृह मंत्री ने महाकालेश्वर कॉरिडोर, केदारनाथ धाम के पुनरुद्धार और बदरीनाथ महायोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में 35 से अधिक तीर्थस्थलों की पुनर्जागृति और उनके महिमामंडन पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत से विभिन्न कालखंडों में बाहर ले जाई गई 642 से अधिक प्राचीन मूर्तियों को वापस लाकर उनके मूल स्थलों पर पुनर्स्थापित किया गया है।

इससे पूर्व, अमित शाह ने देहरादून पहुंचने पर लक्ष्मीनारायण मंदिर में दर्शन किए और गंगा पूजन किया।

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