नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2025 — कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा को आम जन के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बननी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जो वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करे, आलोचनात्मक विचारों को जगह दे और देश की समृद्ध विविधता को प्रतिबिंबित करे।
राहुल गांधी दक्षिण अमेरिका की यात्रा के तहत पेरू की पोंटिफिकल कैथोलिक यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ चिली के छात्रों से संवाद कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, लोकतंत्र और भू-राजनीति पर गहन चर्चा की।
उन्होंने कहा, “जब शिक्षा की बात आती है तो इसकी शुरुआत जिज्ञासा से होती है और खुले विचारों से सोचने, बिना किसी डर या सामाजिक-राजनीतिक बंधनों के प्रश्न पूछने की आजादी से। यही असली स्वतंत्रता की नींव है।”
गांधी ने वैश्विक साझेदारी पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत को लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ फली-फूली एक वैकल्पिक विनिर्माण प्रणाली विकसित करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए अमेरिका या पेरू जैसे देशों के साथ साझेदारी एक संभावित रास्ता हो सकता है।
कांग्रेस पार्टी ने भी राहुल गांधी के इस संवाद का वीडियो अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर साझा किया। पार्टी ने इसे छात्रों के साथ एक “गहन संवाद” बताते हुए कहा कि यह बातचीत आज के बहुध्रुवीय वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका और दिशा पर केंद्रित थी।
राहुल गांधी की यह यात्रा कोलंबिया, ब्राजील, पेरू और चिली तक फैली रही, जहां उन्होंने युवाओं, शिक्षाविदों और नेताओं से संवाद कर लोकतंत्र, शिक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर विचार साझा किए।
