शाहजहांपुर। आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और भक्ति के वातावरण के बीच Shri Ram Chandra Mission द्वारा आयोजित बसंत उत्सव–2026 के दूसरे चरण के दूसरे दिन आश्रम परिसर में हजारों साधकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडिटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक Kamlesh D. Patel (दाजी) के सान्निध्य में सामूहिक ध्यान सत्र आयोजित हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए अभ्यासी एकाग्रचित्त होकर ध्यान में लीन रहे और विश्व शांति व मानव कल्याण की प्रार्थना की।
अपने संदेश में दाजी ने आंतरिक जागरूकता, आत्म-अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण को साधना की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि आत्मा का स्वभाव स्वतंत्रता है और साधना का उद्देश्य उसी मूल स्वरूप को पुनः प्राप्त करना है। निरंतर अभ्यास और सजगता से ही साधक अपने ध्येय तक पहुंच सकता है। ध्यान सत्र के पश्चात आयोजित भजन संध्या में भक्तिमय प्रस्तुतियों ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। आश्रम प्रबंधन और स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका से आयोजन सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
बसंत उत्सव के अवसर पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind भी आश्रम पहुंचे और ध्यान साधना में सहभागिता की। उनके आगमन पर प्रशासनिक अधिकारियों और मिशन पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। आश्रम में दाजी से भेंट कर उन्होंने पुष्पगुच्छ अर्पित किया और कार्यक्रम में शामिल हुए।


पूर्व राष्ट्रपति के आगमन को लेकर जिले में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए। उनका हेलीकॉप्टर Reliance Thermal Power Plant Helipad स्थित हेलीपैड पर उतरा, जहां जिलाधिकारी Dharmendra Pratap Singh और पुलिस अधीक्षक Rajesh Dwivedi ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष Ajay Pratap Singh Yadav ने उन्हें अंगवस्त्र ओढ़ाकर पारंपरिक सम्मान प्रदान किया।
प्रशासन ने हेलीपैड से लेकर आश्रम परिसर तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण और निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई थी। प्रोटोकॉल के अनुरूप पूरा कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति का प्रवास Reliance Guest House में निर्धारित है। वह प्रातःकालीन ध्यान सत्र में भी भाग लेंगे और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगामी दिनों में लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।
बसंत उत्सव के आयोजन को आश्रम के स्वर्ण जयंती वर्ष से भी जोड़ा जा रहा है, जिसके तहत आध्यात्मिक जागरूकता, सामूहिक ध्यान और मानव कल्याण के संदेश को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार यह उत्सव न केवल आध्यात्मिक साधना का मंच है, बल्कि समाज में शांति, समरसता और आत्मिक विकास के संदेश को सुदृढ़ करने का भी प्रयास है।
