गुवाहाटी, 11 जनवरी – भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार को असम के कामरूप जिले में नए एकीकृत न्यायिक अदालत परिसर की गुवाहाटी उच्च न्यायालय बार संघ (जीएचसीबीए) द्वारा विरोध किए जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने जोर दिया कि नए बुनियादी ढांचे के विकास का विरोध करने के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ को वैध आधार नहीं माना जा सकता।
उत्तरी गुवाहाटी के रंगमहल में नए परिसर की आधारशिला रखने के अवसर पर सीजेआई ने कहा, “एकीकृत न्यायिक अदालत परिसर भविष्य की आकांक्षाओं के अनुरूप बनाया गया है। इसका निर्माण वर्तमान के लिए नहीं बल्कि आने वाले दशकों के लिए किया जा रहा है।”
जीएचसीबीए ने उच्च न्यायालय परिसर के गुवाहाटी शहर के मध्य से ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे स्थानांतरण का विरोध किया। संघ ने चार घंटे की भूख हड़ताल की और शिलान्यास समारोह में भाग नहीं लिया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि नए परिसर का विरोध करने वाले या तो गलत जानकारी रखते हैं या वकीलों की नई जरूरतों को नहीं समझते। उन्होंने स्पष्ट किया, “व्यक्तिगत स्वार्थ भविष्य के बुनियादी ढांचे के विकास का विरोध करने का वैध आधार नहीं होना चाहिए।”
सीजेआई ने बताया कि नए परिसर के लिए चुनी गई जगह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और यहां एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि देश की अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या केवल बुनियादी ढांचे से हल नहीं होगी, बल्कि न्याय प्रक्रिया में सभी चरणों में सुधार जरूरी है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “मैंने देखा है कि मुवक्किलों के लिए अदालतों और न्यायाधिकरणों के चक्कर लगाना कितना थकाने वाला होता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से खुशी है कि यह परिसर सब कुछ एक ही सुलभ स्थान पर लाकर इस स्थिति को बदल देगा।”
गुवाहाटी उच्च न्यायालय असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम राज्यों के लिए उच्च न्यायालय के रूप में कार्य करता है।
