वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत बना निवेश का भरोसेमंद ठिकाना: प्रधानमंत्री मोदी

राजकोट। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत आज अभूतपूर्व निश्चितता, राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता का प्रतीक बनकर उभरा है। यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को राजकोट में सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के लिए आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन (वीजीआरसी) के उद्घाटन अवसर पर कही।

प्रधानमंत्री मोदी ने निवेशकों से भारत, विशेषकर सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र में मौजूद अपार अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और शीघ्र ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में देश ने तेज गति से प्रगति की है, जिसमें गुजरात की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

मोदी ने कहा कि नए मध्यम वर्ग का विस्तार और उसकी बढ़ती क्रय शक्ति भारत को संभावनाओं का देश बना रही है। भारत आज दुनिया में सबसे अधिक टीके बनाने वाला देश है और उसकी विकास यात्रा ‘सुधार, प्रदर्शन और रूपांतरण’ के मंत्र पर आधारित है। उन्होंने कहा कि वैश्विक विशेषज्ञों और संस्थाओं में भारत को लेकर अभूतपूर्व आशावाद देखने को मिल रहा है।

डिजिटल और बुनियादी ढांचे की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मोबाइल डेटा का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन चुका है और यूपीआई दुनिया का नंबर-एक रियल टाइम डिजिटल लेनदेन मंच है। सौर ऊर्जा उत्पादन में भारत शीर्ष तीन देशों में शामिल है, वहीं देश का मेट्रो नेटवर्क भी विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में गिना जाता है।

सौराष्ट्र और कच्छ की औद्योगिक क्षमता पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि यह क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने वाला प्रमुख केंद्र बन रहा है। भावनगर जिले का अलंग विश्व का सबसे बड़ा जहाज तोड़ने का केंद्र है, जहां दुनिया के एक-तिहाई जहाजों का पुनर्चक्रण होता है। मोरबी जिला टाइल उद्योग में वैश्विक पहचान बना चुका है, जबकि धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र आधुनिक विनिर्माण का नया केंद्र बन रहा है, जहां देश की पहली सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए शुरुआती बढ़त मौजूद है। “बुनियादी ढांचा तैयार है, नीतियां पूर्वानुमेय हैं और दृष्टिकोण दीर्घकालिक है,” उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने राजकोट के मारवाड़ी विश्वविद्यालय में आयोजित व्यापार मेले का उद्घाटन किया। अधिकारियों के अनुसार, वीजीआरसी के दौरान अमेरिका और यूरोप सहित 16 देशों के 110 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी के साथ 1,500 से अधिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। साथ ही ‘रिवर्स बायर-सेलर मीट’ के दौरान 1,800 से अधिक व्यावसायिक बैठकों का आयोजन प्रस्तावित है।

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