कोहिमा, 10 नवम्बर : संसद के शीतकालीन सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि सदन की कार्यवाही में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संसद को जनता के मुद्दों को उठाने का मंच बनाएं, न कि हंगामे का।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “संसद जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक है। यहां लोगों के मुद्दों पर चर्चा और समाधान होना चाहिए। व्यवधान डालना न तो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप है, न ही देश के हित में।”
उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। विपक्ष ने सत्र की अवधि को “बहुत संक्षिप्त” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
बिरला ने सत्र की छोटी अवधि को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि संसद सत्र बुलाना और उसकी अवधि तय करना सरकार का विशेषाधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया, “सत्र की अवधि सरकार के आधिकारिक एजेंडे पर निर्भर करती है। हमारा प्रयास होगा कि सभी राजनीतिक दलों के साथ संवाद स्थापित कर सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाया जाए।”
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद का दायित्व जनता की आवाज़ बनना है, इसलिए सभी सदस्यों को चाहिए कि वे अपनी ऊर्जा रचनात्मक बहस और नीति निर्माण में लगाएं। उन्होंने कहा कि विगत मानसून सत्र में विपक्षी दलों द्वारा बार-बार हंगामा किए जाने के कारण संसद का कामकाज बाधित हुआ था, जिससे जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाई।
बिरला ने उम्मीद जताई कि आने वाले शीतकालीन सत्र में सभी राजनीतिक दल लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करेंगे और सार्थक बहस के माध्यम से देशहित के मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जाएंगे।
उन्होंने कहा, “संसद जनता का मंदिर है — इसे संवाद, सहयोग और समाधान का मंच बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
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