लखनऊ में अवैध निर्माण पर अब सख्त निगरानी : इंजीनियर–सुपरवाइजर तैयार करेंगे ‘दैनिक प्रवर्तन डायरी’

लखनऊ। राजधानी में अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अब कड़ा और व्यवस्थित प्रवर्तन तंत्र लागू कर दिया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने गुरुवार को नए आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया कि शहर में चोरी-छुपे अनधिकृत बिल्डिंग निर्माण का खेल अब नहीं चलेगा। इसके लिए प्रवर्तन शाखा में तैनात सभी सुपरवाइजर, अवर अभियंता और सहायक अभियंता को अनिवार्य रूप से ‘दैनिक प्रवर्तन डायरी’ बनानी होगी, जिसमें फील्ड में की गई हर कार्रवाई का विवरण दर्ज किया जाएगा।

नई व्यवस्था के मुताबिक, प्रत्येक अधिकारी को रोज-रोज किए गए निरीक्षण, कार्रवाई, अवैध निर्माणों की स्थिति, सीलिंग और ध्वस्तीकरण के मामलों का पूरा ब्योरा अपनी डायरी में दर्ज करना होगा। रिपोर्टिंग अधिकारी स्वयं इस डायरी में दर्ज स्थानों का निरीक्षण करेंगे और कार्रवाई संतोषजनक पाए जाने पर ही संबंधित अधिकारी के वेतन जारी करने का प्रमाण पत्र देंगे। लापरवाही मिलने पर वेतन रोक दिया जाएगा।

उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि शहर में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब फील्ड मॉनिटरिंग मजबूत हो। इसीलिए अब हर प्रवर्तन कर्मी के लिए दैनिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। सुपरवाइजर को प्रतिदिन 8–10 स्थलों का निरीक्षण अनिवार्य होगा, जबकि अवर अभियंता को सुपरवाइजर की कार्रवाई की मॉनिटरिंग के साथ 5 नए स्थलों का निरीक्षण करना होगा।

सहायक अभियंता, अवर अभियंता द्वारा दर्ज 30% स्थलों का निरीक्षण करेंगे और प्रतिदिन दो नए स्थानों का मौका-मुआयना कर डायरी में रिपोर्ट दर्ज करेंगे। इसके बाद रिपोर्टिंग अधिकारी इस डाटा के आधार पर कार्य की गुणवत्ता की पुष्टि करेंगे।

जोनल अधिकारियों के लिए भी नई जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं। उन्हें अवर और सहायक अभियंताओं के निरीक्षण का आकस्मिक सत्यापन करना होगा, साथ ही आवासीय क्षेत्रों में हो रहे गैर-आवासीय अवैध निर्माणों की साप्ताहिक रिपोर्ट देनी होगी।

एलडीए ने प्रवर्तन डायरी का प्रारूप भी जारी कर दिया है। इसमें सील किए गए निर्माणों का पूरा विवरण—निर्माण का प्रकार, क्षेत्रफल, वाद संख्या, सीलिंग आदेश की तारीख, सीलिंग से पूर्व और बाद की तस्वीरें—शामिल करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार ध्वस्त किए गए निर्माणों और लंबित प्रकरणों का भी विस्तृत उल्लेख करना होगा।

नई व्यवस्था से एलडीए में जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों को फील्ड में अधिक सक्रिय रहना होगा। प्रशासन का मानना है कि इस कड़े सिस्टम से राजधानी में अवैध निर्माणों पर काफी हद तक रोक लग पाएगी।

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