नागपुर, 3 जनवरी : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) देश की नई पीढ़ी को “मैकाले मानसिकता” से बाहर निकालने का माध्यम बनेगी। उन्होंने यह बात एक कार्यक्रम के दौरान ‘पीटीआई-वीडियो’ से संवाद में कही।
प्रधान ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, जिसे 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया था, स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उच्च और तकनीकी शिक्षा में भी कई सुधार लाएगी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि देश को मैकाले मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है। एनईपी 2020 नई पीढ़ी को इस दिशा में तैयार करने का माध्यम होगी।”
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। “हमारे युवाओं को नौकरी चाहने वाले ही नहीं, बल्कि नौकरी सृजनकर्ता भी बनना चाहिए। एनईपी इसी दिशा में काम कर रही है। मातृभाषा में शिक्षा, योग्यता और कौशल आधारित अध्ययन से युवा और भावी पीढ़ियां तैयार होंगी,” उन्होंने कहा।
प्रधान ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 नवंबर को छठे रामनाथ गोयनका व्याख्यान में नागरिकों से थॉमस मैकाले द्वारा भारत पर थोपी गई गुलामी की मानसिकता से देश को मुक्त करने का संकल्प लेने का आग्रह किया था। मोदी ने कहा था कि “2035 तक मैकाले द्वारा किए गए शैक्षणिक और सांस्कृतिक अपराध को 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे। हमें अगले दशक में इस मानसिकता से खुद को मुक्त करने का संकल्प लेना होगा।”
कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रेशिमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक बी. हेडगेवार के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर के स्मारक ‘दीक्षाभूमि’ का भी दौरा किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
