प्रयागराज (उप्र), 19 जनवरी । मौनी अमावस्या के मुख्य स्नान पर्व के दौरान प्रयागराज में ज्योतिषपीठ से जुड़े स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस द्वारा कथित रूप से स्नान से रोके जाने का आरोप लगाते हुए अपने शिविर के सामने अन्न-जल त्याग शुरू कर दिया है और प्रशासन व पुलिस अधिकारियों से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़े हैं।
मेला प्रशासन ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि स्नान पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई। मेलाधिकारी ऋषिराज के अनुसार, आपात सेवाओं के लिए आरक्षित पांटून पुल की बैरिकेडिंग स्वामी जी के समर्थकों द्वारा तोड़ी गई, जिसके बाद वे संगम नोज तक पहुंच गए। उन्होंने कहा कि मुख्य स्नान पर्व पर किसी भी तरह के वाहनों की अनुमति नहीं थी और भगदड़ की आशंका को देखते हुए सुरक्षा कारणों से कार्रवाई की गई।
ऋषिराज ने स्पष्ट किया, “हमारे पास साक्ष्य हैं। कई साधु-संत आए और उन्होंने स्नान किया। किसी साधु-संत का अपमान नहीं किया गया। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है।”
जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने 2022 के माघ मेले का हवाला देते हुए बताया कि उस समय ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर विधिक राय ली गई थी। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 14 अक्टूबर, 2022 को अपील पर निर्णय होने तक ज्योतिषपीठ पर किसी को शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक करने से रोकने का आदेश दिया था और मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
इस बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में करीब 15 समर्थक घायल हुए हैं, जिनकी चिकित्सीय जांच कराई गई है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएंगे।
योगीराज ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मेला प्रशासन माफी मांगकर प्रोटोकॉल के अनुसार स्नान की व्यवस्था नहीं करता, तब तक स्वामी जी अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।
उल्लेखनीय है कि रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर रिकॉर्ड 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में स्नान किया। प्रशासन का कहना है कि भारी भीड़ के मद्देनजर सभी व्यवस्थाएं सुरक्षा मानकों के अनुरूप लागू की गईं।
