मणिपुर के नागरिक संगठनों ने कुकी उग्रवादियों से समझौते पर अमित शाह से मांगी जानकारी

इंफाल। मणिपुर के दो प्रमुख नागरिक समाज संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कुकी-जो उग्रवादी समूहों के साथ किए गए अभियान निलंबन (सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस—एसओओ) समझौते को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठनों ने कहा है कि शांति और स्थिरता की दिशा में उठाए गए इस कदम की स्थिति और उसके क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टता आवश्यक है।

मणिपुर के स्वदेशी पीपुल्स फोरम (आईपीएफएम) और फुटहिल्स नगा समन्वय समिति (एफएनसीसी) ने लोक भवन के माध्यम से गृह मंत्री को भेजे गए एक संयुक्त ज्ञापन में 2008 में किए गए एसओओ समझौते की वर्तमान स्थिति, उसके कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगी है। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में शांति बहाल करने के उपाय के रूप में इस समझौते की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष चार सितंबर को दो प्रमुख कुकी-जो उग्रवादी समूहों ने सरकार के साथ पुनर्विचारित शर्तों और नियमों के तहत एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इन शर्तों के तहत मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने, नामित शिविरों को संवेदनशील क्षेत्रों से दूर स्थानांतरित करने तथा राज्य में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए समाधान तलाशने पर सहमति बनी थी।

कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) के साथ किए गए इस समझौते में निगरानी और अनुपालन को सख्त बनाने के लिए कुछ संशोधन भी किए गए थे। नागरिक संगठनों ने यह स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या ये संशोधन पूरी तरह से लागू किए गए हैं या नहीं।

ज्ञापन के अनुसार, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में मणिपुर के पांच जिलों—चुराचांदपुर, तेंगनौपाल, कांगपोकपी, चंदेल और फेरजौल—में स्थित विभिन्न एसओओ समूहों से जुड़े कुल 2,167 कैडरों को निर्दिष्ट शिविरों में रखा गया है। संगठनों ने आशंका जताई है कि एसओओ की शर्तों को लागू करने में अस्पष्टता या कथित निष्क्रियता से वैधानिक प्राधिकारों में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है।

ज्ञापन में कहा गया है, “हम आपसे विनम्रतापूर्वक निवेदन करते हैं कि एसओओ के अंतर्निहित ढांचे और उसके प्रवर्तन की व्यापक, पारदर्शी और समयबद्ध समीक्षा पर विचार किया जाए, ताकि राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करने की प्रक्रिया को मजबूती मिल सके।”

गौरतलब है कि मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है। यह हिंसा उस समय भड़की थी, जब पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में एक आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था। इसके बाद से कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों समेत लगभग 260 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।

राज्य में पिछले वर्ष फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है और शांति बहाली के प्रयास लगातार जारी हैं।

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