नई दिल्ली, 27 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वैश्विक निवेशकों से भारत के तेजी से बढ़ते ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह क्षेत्र करीब 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश अवसर प्रदान करता है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन (रिफाइनिंग) केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
‘भारत ऊर्जा सप्ताह (आईईडब्ल्यू) 2026’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने निवेशकों से तेल शोधन, एलएनजी वैल्यू चेन अवसंरचना, सिटी गैस वितरण और तेल एवं गैस अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में निवेश करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक तेल एवं गैस क्षेत्र में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,
“ऊर्जा क्षेत्र हमारी आकांक्षाओं का केंद्र है। इसमें 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर मौजूद हैं। मेरी अपील है—भारत में बनाइए, भारत में नवाचार कीजिए, भारत के साथ विस्तार कीजिए और भारत में निवेश कीजिए।”
उन्होंने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत पहले ही दुनिया के शीर्ष पांच निर्यातकों में शामिल है। अन्वेषण क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस क्षेत्र को काफी हद तक खोल दिया है और गहरे समुद्र में अन्वेषण के लिए ‘समुद्र मंथन’ परियोजना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दशक के अंत तक तेल एवं गैस अन्वेषण का दायरा 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत अब तक 170 से अधिक ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं। उन्होंने अंडमान एवं निकोबार बेसिन को देश की अगली बड़ी हाइड्रोकार्बन संभावना बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि अन्वेषण क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं और प्रतिबंधित क्षेत्रों में उल्लेखनीय कमी लाई गई है।
“आईईडब्ल्यू के पिछले संस्करण में मिले सुझावों के अनुरूप नियमों में बदलाव किए गए हैं। इससे निवेशकों की लाभप्रदता निश्चित रूप से बढ़ेगी,” प्रधानमंत्री ने कहा।
तेल शोधन क्षमता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत इस समय 26 करोड़ टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) की शोधन क्षमता के साथ दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जिसे बढ़ाकर 30 करोड़ टन प्रति वर्ष से अधिक करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि भारत शीघ्र ही इस क्षेत्र में पहले स्थान पर पहुंच जाएगा।
एलएनजी पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और देश का लक्ष्य अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 15 प्रतिशत एलएनजी से पूरा करना है। इसके लिए संपूर्ण एलएनजी वैल्यू चेन पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एलएनजी परिवहन के लिए आवश्यक जहाजों का निर्माण भी अब भारत में किया जा रहा है और हाल ही में 70,000 करोड़ रुपये का जहाज निर्माण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसा ऊर्जा परिवेश तैयार कर रहा है जो घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ किफायती शोधन और परिवहन समाधानों के जरिए वैश्विक निर्यात को भी प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
उल्लेखनीय है कि ‘भारत ऊर्जा सप्ताह 2026’ ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और नवप्रवर्तकों को एक मंच पर लाने वाला प्रमुख वैश्विक आयोजन है।
