भाजपा ने बीएमसी में ठाकरे बंधुओं को, पुणे महानगरपालिका चुनावों में पवार परिवार को दी करारी शिकस्त

मुंबई, 16 जनवरी – अविभाजित शिवसेना के लगभग तीन दशक पुराने वर्चस्व को तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की। भाजपा ने पुणे और पिंपरी–चिंचवड नगर निकाय चुनावों में भी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) गठबंधन को पीछे छोड़ दिया।

भाजपा-नीत गठबंधन को बीएमसी की कुल 227 सीटों में से लगभग 125 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। देश के सबसे धनी नगर निकाय बीएमसी का वर्ष 2025–26 का अनुमानित बजट 74,427 करोड़ रुपये है। मतदान के एक दिन बाद शुक्रवार को मतगणना हुई। इन चुनावों में 54.77 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के मजबूत प्रदर्शन के साथ भाजपा अब बीएमसी में सत्ता संभालने की सबसे मजबूत स्थिति में है। इस चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लगभग दो दशक बाद एकजुट हुए थे, लेकिन घोषित परिणामों के रुझानों से संकेत मिलता है कि उनका गठबंधन अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका।

पुणे और पिंपरी–चिंचवड में भाजपा की जीत को पवार परिवार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जहां राकांपा के दोनों गुटों ने स्थानीय स्तर पर गठजोड़ किया था। इन परिणामों का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिया जा रहा है, जिनके नेतृत्व में भाजपा ने 2017 के बीएमसी चुनावों में जीती गई 82 सीटों के आंकड़े को भी पार कर लिया है।

भाजपा के ‘मिशन मुंबई’ की सफलता ने उसे देश की वित्तीय राजधानी में प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है। यह परिणाम मुंबई की सत्ता संरचना में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत देता है, क्योंकि बीएमसी लंबे समय तक ठाकरे-नेतृत्व वाली शिवसेना का अजेय गढ़ मानी जाती रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन नतीजों से मुंबई की राजनीति का विमर्श ‘मराठी अस्मिता’ से हटकर भाजपा के ‘विकास’ और शहरी अवसंरचना केंद्रित एजेंडे की ओर स्थानांतरित होता दिख रहा है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने कहा कि बीएमसी चुनावों में भाजपा और शिवसेना का प्रदर्शन उनके हिंदुत्व एजेंडे के लिए स्पष्ट जनादेश है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “जो हिंदू की बात करेगा, वही महाराष्ट्र पर राज करेगा।”

इस बीच, 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के आरोपी श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निकाय में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पार्षद पद का चुनाव जीतकर ध्यान आकर्षित किया है।

मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गृह नगर नागपुर में, 151 सदस्यीय महानगरपालिका के लिए मतगणना के रुझान 2017 के परिणामों की पुनरावृत्ति का संकेत दे रहे हैं। यहां भाजपा 108 सीटों के अपने पुराने आंकड़े को पार करने की ओर अग्रसर है, जबकि कांग्रेस प्रभाव बढ़ाने के लिए संघर्ष करती दिख रही है।

हालांकि, कांग्रेस ने लातूर महानगरपालिका में 70 में से 40 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जहां भाजपा दूसरे स्थान पर रही।

उल्लेखनीय है कि 15 जनवरी को 29 नगर निकायों के चुनाव हुए थे, जिनमें से अधिकांश का कार्यकाल 2020 से 2023 के बीच समाप्त हो चुका था। इनमें नौ नगर निकाय मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में स्थित हैं, जो देश का सबसे अधिक शहरीकृत क्षेत्र माना जाता है।

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