लखनऊ। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए नए वर्ष की शुरुआत राहत और भरोसे के साथ हुई है। एक ओर जहां बिजली बिल राहत योजना–2025 के पहले चरण की अवधि को जनता की भारी सहभागिता को देखते हुए तीन दिन और बढ़ा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा नई कॉस्ट डाटा बुक लागू करने और स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय किए जाने से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। इन दोनों फैसलों को प्रदेश में उपभोक्ता हितों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की पहल पर बिजली बिल राहत योजना–2025 के प्रथम चरण को 3 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। पहले चरण के अंतिम दिन देर रात तक चले राहत शिविरों में उमड़ी भारी भीड़, आमजन की सक्रिय भागीदारी और योजना के प्रति उत्साह को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। इस विस्तार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र उपभोक्ता योजना के लाभ से वंचित न रह जाए। योजना का पहला चरण अत्यंत सफल रहा है और इसके तहत प्रदेशभर में आयोजित शिविरों के माध्यम से करीब 31 लाख उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इस दौरान 5363 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली बिल छूट दी गई, जिसे ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
इस योजना के अंतर्गत न केवल हालिया बकाया, बल्कि दशकों पुराने बिजली बिलों पर भी उपभोक्ताओं को तीन-चौथाई तक की छूट प्रदान की गई है। इससे गरीब, मध्यम वर्ग और छोटे उपभोक्ताओं को लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक और मानसिक बोझ से बड़ी राहत मिली है। ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 3 जनवरी तक नजदीकी राहत शिविरों में पहुंचकर योजना का लाभ अवश्य लें और बकाया बिलों के बोझ से मुक्त हों। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश में सामाजिक और आर्थिक राहत का मजबूत आधार बनेगी।
इसी क्रम में, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पूरे प्रदेश के लिए नई कॉस्ट डाटा बुक जारी कर दी है, जिसे हर हाल में 12 जनवरी तक लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट कर समयसीमा के भीतर इसे प्रभावी रूप से लागू करने को कहा है। नए वर्ष पर इसे विद्युत उपभोक्ताओं के लिए एक बड़े तोहफे के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले को लेकर उपभोक्ता परिषद के प्रतिनिधियों ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार, सदस्य संजय कुमार सिंह और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से भेंट कर आभार जताया और नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
नई कॉस्ट डाटा बुक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। नियामक आयोग ने तय किया है कि सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम कीमत 2800 रुपये और थ्री फेस मीटर की अधिकतम कीमत 4100 रुपये ही वसूली जा सकेगी। इससे पहले बिजली कंपनियों द्वारा बिना अनुमति जारी आदेश के तहत कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही थी, जिसे अब नियामक आयोग ने नियंत्रित कर दिया है। इसके साथ ही, कॉस्ट डाटा बुक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विद्युत अधिनियम 2003 के तहत उपभोक्ताओं को पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर चुनने का पूरा अधिकार है और पोस्टपेड कनेक्शन पर सिक्योरिटी राशि लेकर कनेक्शन देना पूरी तरह कानूनी है।
बिजली बिल राहत योजना के विस्तार और नई कॉस्ट डाटा बुक के लागू होने से यह संकेत मिला है कि प्रदेश सरकार और नियामक संस्थाएं उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दे रही हैं। इन फैसलों से न केवल लाखों उपभोक्ताओं को तत्काल आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में पारदर्शी, न्यायसंगत और उपभोक्ता–अनुकूल बिजली व्यवस्था की दिशा में भी मजबूत आधार तैयार होगा।
